राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नया मोड़, SIT जांच में डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर उठे सवाल

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नया मोड़, SIT जांच में डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर उठे सवाल

अयोध्या/लखनऊ। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले में विशेष जांच दल यानी SIT की जांच को लेकर नया दावा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विस्तृत जांच में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और चढ़ावा गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि SIT ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों और चढ़ावे की गणना से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की जांच की। इस दौरान डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका संदिग्ध पाई गई। कथित जांच में उनकी संलिप्तता की ओर संकेत मिलने की बात कही गई है। हालांकि SIT या शासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

अनिल मिश्रा और सुभाष की भूमिका पर सवाल

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मंदिर में हुई नियुक्तियों में डॉ. अनिल मिश्रा की सिफारिश से कई लोगों को काम पर रखा गया था। जांच में यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि चढ़ावे की गणना के दौरान गड़बड़ी हो रही थी, तो जिम्मेदार लोगों ने उसे समय रहते क्यों नहीं रोका।

गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव पहले से इस मामले में आरोपी हैं और जेल में बंद बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां कथित चोरी की पूरी व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्ति और निगरानी में हुई लापरवाही का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।

एफआईआर में बढ़ सकते हैं कुछ नाम

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, SIT की प्रारंभिक जांच के आधार पर दर्ज एफआईआर में टिन्नू यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प, लवकुश, मनीष, अविनाश, करुणेश और रमाशंकर सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।

अब विस्तृत जांच के बाद एफआईआर में कुछ अन्य नाम शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इनमें ट्रस्ट से जुड़े लोगों के साथ कुछ बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो सकती है। फिलहाल पुलिस या SIT ने संभावित नए आरोपियों के नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

चंपत राय के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश नहीं

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि SIT जांच में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की आपराधिक संलिप्तता अथवा मिलीभगत का उल्लेख नहीं किया गया है। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश सामने नहीं आई है।

हालांकि ट्रस्ट में जिम्मेदार पद पर रहने के कारण उन पर प्रशासनिक और नैतिक जवाबदेही के सवाल उठते रहे हैं। उनका इस्तीफा पहले ही स्वीकार किए जाने की खबर सामने आ चुकी है।

चढ़ावा गणना व्यवस्था में बदलाव की तैयारी

बताया जा रहा है कि SIT ने भविष्य में चढ़ावे की गणना को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें केवल नियमित बैंक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने, हर 15 दिन में कर्मचारियों को बदलने और बैंक के एक अधिकारी की निगरानी सुनिश्चित करने जैसी सिफारिशें शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त दानपात्रों की चाबी ट्रस्ट के किसी जिम्मेदार पदाधिकारी के पास रखने और उसी की निगरानी में गणना कराने का सुझाव भी दिए जाने की बात कही गई है।

इस मामले में SIT की आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने और शासन अथवा पुलिस के बयान के बाद ही आरोपों एवं संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोप सिद्ध होने का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।