जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर नोटिस से गरमाई सियासत, अखिलेश यादव ने BJP पर साधा निशाना
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी को मिले ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद प्रदेश की राजनीति तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए बिना नाम लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा।
शिक्षा के मुद्दे पर भाजपा को घेरा
अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में कहा कि भाजपा को शिक्षा के क्षेत्र में भी सांप्रदायिकता दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा, शिक्षक, छात्र और शिक्षा के बाद मिलने वाले रोजगार जैसे मुद्दे भाजपा की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं हैं।
उन्होंने आगे लिखा कि भाजपा अपने “अनरजिस्टर्ड सहयोगियों” के कथित अवैध भवनों और कार्यालयों पर कार्रवाई कब करेगी। अखिलेश ने सवाल उठाया कि यदि कोई संगठन पंजीकृत नहीं है तो उसके भवन और संस्थान किस आधार पर वैध माने जाते हैं।
सपा प्रवक्ता ने भी उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों—जैसे लखनऊ विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU)—के नक्शे की स्थिति पर सरकार को भी स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही आजम खान का नाम सामने आता है, सरकार को सभी नियम-कानून याद आ जाते हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि चुनाव नजदीक होने के कारण ऐसी कार्रवाई की जा रही है।
क्या है जौहर यूनिवर्सिटी का मामला?
रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने 15 जुलाई को जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में बने कई निर्माणों को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया है।
इस मामले पर आजम खान की पत्नी और पूर्व सांसद डॉ. तजीन फातिमा ने कहा कि उन्हें नोटिस प्राप्त हो गया है और जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है।
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर जारी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है।
