यूपी सरकार पर हाईकोर्ट सख्त, जमानत में देरी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना; जिम्मेदार पुलिसकर्मियों से होगी वसूली

यूपी सरकार पर हाईकोर्ट सख्त, जमानत में देरी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना; जिम्मेदार पुलिसकर्मियों से होगी वसूली

प्रयागराज/नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका के निस्तारण में अनावश्यक देरी को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की लापरवाही और समय पर केस डायरी उपलब्ध न कराने के कारण सुनवाई में देरी हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि यह राशि तत्काल याचिकाकर्ताओं को दी जाए और बाद में जांच कर जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों से इसकी वसूली की जाए।

क्या है मामला?

मामला बिजनौर जिले के चांदपुर थाना क्षेत्र का है, जहां दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के एक मामले में मृतका की सास सबीला और ससुर यासीन की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों 28 फरवरी 2026 से जेल में बंद थे।

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि मृतका को दहेज की मांग पूरी न होने के कारण प्रताड़ित किए जाने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। गवाहों के बयान भी पति-पत्नी के बीच सामान्य घरेलू विवाद की ओर संकेत करते हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत दे दी।

केस डायरी न भेजने पर कोर्ट नाराज

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत के समक्ष बताया गया कि 17 जून को संयुक्त निदेशक (अभियोजन) ने जमानत याचिका की प्रति पुलिस पैरोकार को भेज दी थी। इसके बाद 19 जून को बिजनौर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को अलर्ट भेजा गया और 29 जून को रिमाइंडर भी जारी किया गया।

इसके बावजूद समय पर केस डायरी अदालत में पेश नहीं की गई। 3 जुलाई को सीसीटीएनएस पोर्टल से दस्तावेज मंगवाए गए, लेकिन पुलिस ने केस डायरी की जगह केवल आरोपियों का आपराधिक इतिहास भेज दिया।

पुलिस अधिकारियों ने दिए अलग-अलग कारण

मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों ने देरी के अलग-अलग कारण बताए। थाना प्रभारी राहुल सिंह ने अवकाश और कांवड़ यात्रा ड्यूटी का हवाला दिया। एक उपनिरीक्षक ने संचार व्यवस्था में कमी को वजह बताया, जबकि क्षेत्राधिकारी (सीओ) देश दीपक सिंह ने कहा कि उन्हें हाईकोर्ट के संदेशों की जानकारी हेड कांस्टेबल ने नहीं दी।

कोर्ट बोली- जिम्मेदारी से नहीं बच सकते अधिकारी

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। अदालत ने कहा कि यदि समय पर केस डायरी उपलब्ध करा दी जाती तो जमानत याचिका का निस्तारण 3 जुलाई को ही हो सकता था।

एसपी को जांच और कार्रवाई के निर्देश

अदालत ने बिजनौर के एसपी को पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा कि आवश्यकता पड़ने पर जुर्माने की 50 हजार रुपये की राशि जिम्मेदार अधिकारियों से वसूल की जाए। कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और बिजनौर एसपी को भी भेजने के निर्देश दिए हैं।