‘उम्र पर तंज न कसें, मैं आपका अंत देखकर ही जाऊंगी’, बीजेपी पर बरसीं ममता बनर्जी

‘उम्र पर तंज न कसें, मैं आपका अंत देखकर ही जाऊंगी’, बीजेपी पर बरसीं ममता बनर्जी

New Delhi : पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एज-शेमिंग (उम्र को लेकर तंज कसने) को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति का उसकी उम्र के आधार पर अपमान नहीं किया जाना चाहिए।

ममता बनर्जी ने कहा, “चुनाव परिणाम वाले दिन बीजेपी के गुंडों ने दुआ की थी कि मुझे हार्ट अटैक आ जाए और मेरी मौत हो जाए। लेकिन मैं उन्हें साफ बता देना चाहती हूं कि मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक आपका अंत न देख लूं। मैं आम लोगों, गरीबों और मजदूरों के अधिकारों के लिए लड़ती रहूंगी। हमारे पास समर्पित कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है और लगातार नए लोग भी पार्टी से जुड़ रहे हैं।”

2026 विधानसभा चुनाव में TMC को बड़ा झटका

वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हुए। करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में TMC 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि बीजेपी ने 208 सीटें जीतकर पहली बार राज्य में सरकार बनाई।

इस चुनाव में ममता बनर्जी भी अपनी पारंपरिक भवानीपुर विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के हाथों 15 हजार से अधिक मतों से चुनाव हार गईं। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

चुनाव के बाद पार्टी में बगावत

चुनाव परिणाम आने के करीब एक महीने बाद जून 2026 में तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर शुरू हुआ विवाद पार्टी में विभाजन का कारण बन गया। 80 में से 64 विधायकों ने बगावत करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया। दो-तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस गुट को मान्यता दे दी।

यह राजनीतिक संकट केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहा। लोकसभा में भी काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 28 में से 20 सांसदों ने अलग गुट बनाते हुए केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस टूट की प्रमुख वजह अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका को लेकर वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और सत्ता से बाहर होने के बाद संगठनात्मक असंतोष रहा।

कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों से घिरी TMC

फिलहाल तृणमूल कांग्रेस आंतरिक संकट और कानूनी लड़ाइयों का सामना कर रही है। बागी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी से पार्टी के मार्गदर्शक बने रहने का अनुरोध किया है।

पार्टी के आधिकारिक व्हिप, संगठन पर अधिकार और ‘असली TMC’ को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट और विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है। सत्ता गंवाने और पार्टी के बड़े हिस्से के अलग हो जाने के बाद यह दौर ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण दौरों में से एक माना जा रहा है।