सत्य निकेतन में भरभराकर गिरी 5 मंजिला इमारत, 6 की मौत: मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी; PG में रहते थे DU के छात्र
नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन की एक संकरी गली में रविवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला जर्जर इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। यह इमारत पेइंग गेस्ट (PG) के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 8 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मलबे में कई और लोगों के दबे होने की आशंका है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
हादसे का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें पांच मंजिला इमारत कुछ ही सेकेंड में ताश के पत्तों की तरह ढहती दिखाई दे रही है। वीडियो हादसे की भयावहता को साफ तौर पर दिखाता है।
PG में रहते हैं देशभर से आए छात्र
सत्य निकेतन और आसपास की गलियों में बड़ी संख्या में छात्र PG में रहते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले छात्र अक्सर यहां किराए पर कमरे लेते हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगते रहे हैं कि इलाके में कई ऐसी इमारतों को PG के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनके निर्माण या व्यावसायिक इस्तेमाल की अनुमति को लेकर सवाल हैं।
हादसे के बाद कई छात्रों के परिवारों में दहशत का माहौल है। परिजनों को अपने बच्चों की चिंता सता रही है और कई लोग उनसे संपर्क नहीं हो पाने के कारण परेशान हैं।
इमारत मालिक के खिलाफ केस दर्ज
दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में इमारत के मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या, इमारत के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने समेत अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने बताया कि इमारत का इस्तेमाल PG के तौर पर किया जा रहा था। आरोप है कि भूतल पर मरम्मत का काम चल रहा था, जिसके बाद इमारत ढह गई। आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं।
स्थानीय लोगों ने भी रेस्क्यू में की मदद
इमारत गिरने के बाद मौके पर पहुंचे बचाव दल के साथ स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद की। लोगों ने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबा हटाकर दबे लोगों को तलाशने की कोशिश की।
रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF की दो टीमें करीब 70 कर्मियों के साथ जुटी हैं। एक डॉग स्क्वॉड की मदद से भी मलबे में जीवित लोगों की तलाश की जा रही है। दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), नगर निगम, कैट्स और सिविल डिफेंस की टीमें भी मौके पर मौजूद हैं।
मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचाई गई ऑक्सीजन
NDRF के अधिकारियों के मुताबिक मलबे में फंसे लोगों को सांस लेने में मदद देने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर नीचे पहुंचाए गए हैं। बचावकर्मी बेहद सावधानी से मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि हादसे के बाद मलबे में दबे कुछ छात्रों ने मोबाइल फोन के जरिए बाहर मौजूद लोगों से संपर्क कर मदद मांगी। इससे रेस्क्यू टीमों को संभावित रूप से फंसे लोगों की लोकेशन का पता लगाने में मदद मिली।
मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन हादसे की वजह और इमारत में चल रहे निर्माण या मरम्मत कार्य की भी जांच कर रहा है।
सत्य निकेतन की इस घटना ने दिल्ली में जर्जर इमारतों और अनधिकृत PG के संचालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर इमारत की हालत इतनी खराब होने के बावजूद वहां छात्रों को रहने की अनुमति कैसे मिली और सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ।
