‘ट्वीट, एसी और पीसी के नेता’, ओपी राजभर का अखिलेश पर तीखा हमला, बोले-2027 के बाद लंदन चले जाएंगे
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. मंगलवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर किए गए पोस्ट में राजभर ने अखिलेश यादव को “ट्वीट, एसी और पीसी के नेता” करार देते हुए कहा कि उनके मन में अखिलेश को लेकर कभी कोई संदेह नहीं रहा. उन्होंने लिखा कि जिस दिन अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी की जीत की मुनादी शुरू की, उसी दिन तय हो गया था कि तृणमूल कांग्रेस हारने वाली है.
राजभर ने आगे कहा, “अखिलेश जी ने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे का समर्थन किया वो हार गए. दिल्ली में केजरीवाल की सरकार का समर्थन कर रहे थे, हार गए. तेजस्वी यादव के लिए गांव-गांव घूमे. तेजस्वी हार गए. राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनवा रहे थे वह भी पराजित हुए. अखिलेश खुद 2014, 2017, 2019, 2022 का चुनाव हार गए. 2027 में भी हारेंगे.”
“अखिलेश के पीछे सजातीय वोटों के अलावा कोई ताकत, कोई गुण नहीं”
मंत्री ने अखिलेश की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा, “अखिलेश के पीछे सजातीय वोटों के अलावा कोई ताकत, कोई गुण नहीं है. दोपहर तक सोते हैं. एसी से बाहर निकलते नहीं हैं और सोशल मीडिया के अलावा कहीं दिखाई नहीं देते हैं. मुख्यमंत्री भी बने तो वह आदरणीय मुलायम सिंह यादव जी और चाचा शिवपाल की मेहनत थी. 2012 का चुनाव मुलायम सिंह जी और शिवपाल का था.”
राजभर ने चेतावनी देते हुए लिखा, “गांठ बांध लीजिए. 2027 का चुनाव के बाद अखिलेश जी की राजनीति खत्म हो जाएगी और वह लंदन चले जाएंगे.”
पिछले दिनों के हमले
यह हमला अकेला नहीं है. राजभर पिछले कई दिनों से अखिलेश यादव और सपा पर लगातार निशाना साध रहे हैं. उन्होंने सपा पर बहुजन समाज (राजभर, निषाद, चौहान आदि) के साथ अन्याय करने, उनके हकों पर डकैती डालने और मुगलों-अंग्रेजों से ज्यादा अन्याय करने का आरोप लगाया है. राजभर ने कहा कि 2027 में बहुजन समाज सपा की ‘खटिया खड़ी’ और ‘बिस्तरा गोल’ कर देगा.
उन्होंने अखिलेश पर सत्ता से दूर होने का दर्द सहन न कर पाने और राजभर समाज के सदस्यों पर हमलों का भी जिक्र किया. साथ ही यादवों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए महाराजा सुहेलदेव, अवंती बाई लोधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे बहुजन प्रतीकों का हवाला दिया.
