चिन्मय अमृत महोत्सव का PM मोदी ने किया उद्घाटन, बोले- सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने चिन्मय मिशन के आध्यात्मिक योगदान, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है, जिसने दशकों से भारतीय मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को आगे बढ़ाने का काम किया है।
प्रधानमंत्री ने इस आयोजन में शामिल होने को अपने लिए आध्यात्मिक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि यह संतों का उनके प्रति विशेष स्नेह और आशीर्वाद है। पीएम मोदी ने चिन्मय मिशन से जुड़े संतों, आचार्यों, साधकों और अनुयायियों को चिन्मय अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं भी दीं।
‘चिन्मय मिशन केवल संस्था नहीं, एक विचार है’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि चिन्मय मिशन की यात्रा चिन्मय संकल्पों से भरी रही है। उन्होंने कहा, “चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं है, ये चिन्मय विचार है।” इसकी स्थापना एक ऐसे ऋषि ने की थी, जिनके विचारों ने आध्यात्मिक चेतना को नई दिशा दी।
पीएम मोदी ने कहा कि जो चिन्मय है, वह स्वाभाविक रूप से अमर और अमृतमय है। इसी वजह से भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव का नाम भी सार्थक है। उन्होंने इस आयोजन को आध्यात्मिक परंपराओं और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
युवाओं को लेकर क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी?
प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन के प्रयासों से आज लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर के रूप में काम कर रहे हैं।
पीएम मोदी के मुताबिक, ये युवा भारतीय मूल्यों और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से देश की सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसे आगे बढ़ाने की भावना के साथ काम करने का संदेश दिया।
‘राष्ट्र ही हमारे अस्तित्व का आधार’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राष्ट्र, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के संबंध पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का हित चाहने वाले लोगों को देश को जाग्रत और उन्नत बनाने के लिए काम करना चाहिए।
पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद जी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी विचार के साथ बिताया। वे आध्यात्मिक विषयों पर जितनी श्रद्धा से बोलते थे, उतनी ही तत्परता से राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखते थे।
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मभूमि है। ये राष्ट्र ही हमारे अस्तित्व का आधार है।” उन्होंने भारतीय संस्कृति और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विचारों को आगे बढ़ाने पर जोर
चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन आध्यात्मिक विरासत, भारतीय मूल्यों और राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित रहा। उन्होंने चिन्मय मिशन के योगदान की सराहना करते हुए युवाओं को भारत की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
प्रधानमंत्री के संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि भारत को मजबूत बनाने के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है और देश की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
