कर्नाटक में ‘वंदे मातरम’ के 2 अंतरे गाने के आदेश को चुनौती, हाईकोर्ट में PIL दाखिल
कर्नाटक सरकार के उस आदेश को जनहित याचिका (PIL) के जरिए चुनौती दी गई है, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो अंतरे गाने का निर्देश दिया गया था। एडवोकेट अंगद कामथ की ओर से दाखिल याचिका में राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में पूछा गया है कि क्या राज्य सरकार कार्यकारी आदेश के जरिए राष्ट्रगान की तरह ही किसी अन्य राष्ट्रीय प्रतीक के स्वरूप और विषय-वस्तु को तय कर सकती है।
कर्नाटक सरकार के आदेश पर उठे सवाल
PIL में दावा किया गया है कि कर्नाटक सरकार का आदेश केंद्र सरकार के उस निर्देश के विपरीत है, जिसके तहत राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरे गाए जाने की बात कही गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा केवल दो अंतरे गाने का निर्देश देना उसके अधिकार क्षेत्र से जुड़ा सवाल खड़ा करता है। याचिका में इस आदेश की वैधता और केंद्र के निर्देश के साथ इसके टकराव की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में पूरा गायन
कर्नाटक सरकार के आदेश के मुताबिक, सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरे गाए जाएंगे। वहीं जिन कार्यक्रमों में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल शामिल होंगे, उनमें वंदे मातरम का पूरा गायन किया जाएगा।
वंदे मातरम को लेकर कानून में क्या बदलाव हुआ?
याचिका में Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में किए गए कथित संशोधन का भी हवाला दिया गया है। इसमें वंदे मातरम को लेकर कानूनी सुरक्षा बढ़ाए जाने की बात कही गई है।
संशोधित प्रावधानों के तहत जानबूझकर वंदे मातरम के गायन को रोकना या इसे गाने वाली सभा में बाधा डालना अपराध हो सकता है। इसके लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है।
अब इस मामले में अदालत के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि राज्य सरकार को सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन की अवधि और अंतरों की संख्या तय करने का अधिकार किस सीमा तक है।
