US ट्रेड डील से पहले भारत ने खींची ‘रेड लाइन’, कहा- ‘…तभी लगेगी मुहर’

US ट्रेड डील से पहले भारत ने खींची ‘रेड लाइन’, कहा- ‘…तभी लगेगी मुहर’

New Delhi : केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) पर भारत की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि इस डील अंतिम रूप तभी दिया जाएगा, जब अमेरिका भारत को उसके प्रतिस्पर्धी देशों (जैसे वियतनाम, बांग्लादेश, चीन आदि) की तुलना में बेहतर और रियायती टैरिफ का लाभ देगा. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से जुड़े एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘जैसे ही अमेरिका हमारे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में हमें तरजीही दर देने में सक्षम होगा, हम बीटीए को अंतिम रूप देंगे और इसका अंतिम ब्योरा घोषित करेंगे.’

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत द्वारा अंतिम रूप दिए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट घरेलू कारोबारियों के लिए निर्यात के बड़े अवसर उपलब्ध कराते हैं. उन्होंने कहा कि भारत आने वाले महीनों या वर्षों में कनाडा, मेक्सिको, चिली, मर्कोसुर, एसएसीयू, जीसीसी और इजरायल के साथ भी व्यापार समझौते करेगा. मर्कोसुर, दक्षिण अमेरिका का एक प्रमुख क्षेत्रीय आर्थिक और व्यापारिक संगठन है जबकि एसएसीयू दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ और जीसीसी खाड़ी सहयोग परिषद है. जीसीसी में पश्चिम एशिया के छह देश शामिल हैं.

केंद्रीय उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का बयान ऐसे समय में आया है जब उनके अमेरिका दौरे की खबर सामने आ रही है. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार (2 सितंबर 2026) को कहा कि पीयूष गोयल इस महीने के अंत में अमेरिका की यात्रा करेंगे, जहां वह G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वार्ता पर चर्चा करेंगे. सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है.

उन्होंने कहा, ‘दोनों सरकारें ऐसे व्यापारिक संबंध बनाने की दिशा में काम कर रही हैं, जो निष्पक्ष, पारस्परिक और दोनों देशों के लिए लाभकारी हों. अमेरिका और भारत बहुत करीबी से मिलकर काम कर रहे हैं और बहुत कुछ हो रहा है. वॉशिंगटन G20 बैठकों के लिए गोयल की मेजबानी करने को लेकर उत्सुक है. भारत और अमेरिका के बीच सहयोग केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई अन्य क्षेत्र भी शामिल हैं.’

उन्होंने इस साल की शुरुआत में हस्ताक्षरित पैक्ट सिलिका घोषणा का भी जिक्र किया. गोर के अनुसार, इस घोषणा का उद्देश्य इनोवेशन को बढ़ावा देने वाला रेगुलेटरी स्ट्रक्चर तैयार करना और अमेरिकी- भारतीय कंपनियों द्वारा सीमा-पार निवेश को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि यह पहल दोनों देशों में उद्यमियों और नए कारोबार खड़े करने वाली अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने में भी मदद करेगी.

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