‘बेईमानी बहुत महंगी पड़ेगी’, शिवसेना UBT की इमरजेंसी बैठक में पहुंचे सिर्फ 3 सांसद, संजय राउत ने दी चेतावनी
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 बागी सांसदों को मनाने की एक आखिरी कोशिश भी नाकामयाब साबित हुई. संजय राउत और अरविंद सावंत ने संसदीय बोर्ड की इमरजेंसी बैठक रखी थी जिसमें सभी 9 सांसदों को शामिल होने के लिए व्हिप जारी किया गया था. हालांकि, बैठक में पहुंचे केवल तीन ही सांसद. वही तीन, जो पहले से पार्टी के साथ बने हुए हैं. बाकी 6 बागियों में से कोई इस मीटिंग में शामिल नहीं हुआ.
बागी सांसदों द्वारा व्हिप को नजरअंदाज किए जाने पर संजय राउत भड़क गए और उन्होंने दो टूक कहा कि यह पार्टी व्हिप उल्लंघन है. इसके लिए सांसदों से जवाब मांगा जाएगा. अगर वो लोकसभा स्पीकर से मिले हैं तो फोटो दिखा दीजिये. इस बार एकनाथ शिंदे और सभी 6 सांसदों को बेईमानी बहुत महंगी पड़ेगी.
दो सांसदों ने भरोसा दिया था कि नहीं जाएंगे, अब टूटी उम्मीद
उद्धव ठाकरे गुट के सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व ने अब उम्मीद छोड़ दी है. अब जब ये 6 सांसद इस बैठक में नहीं आए हैं तो इनको बागी और गद्दार माना जा सकता है. सूत्रों की मानें तो 6 में से दो सांसद लगातार भरोसा दे रहे थे कि वे शिंदे गुट के साथ नहीं जाएंगे.
सूत्रों के मुताबिक, 3 महीने पहले एक-दो सांसदों ने इस बात की ओर इशारा किया था कि शिंदे गुट की तरफ से उनसे संपर्क किया जा रहा है लेकिन उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी के नेताओं को भरोसा था कि ये सांसद उस गुट की तरफ नहीं जाएंगे. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में खेल बदल गया.
7 दिन के अंदर कारण बताओ नोटिस का देना होगा जवाब
वहीं, लोकसभा में संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने कहा, “जो सांसद बैठक में नहीं आए हैं उनको कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा और उन्हें 7 दिन के अंदर जबाव देना होगा. अगर जवाब नहीं आया तो आगे की कार्रवाई की जाएगी. स्पीकर को चिट्टी लिखेंगे.”
संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट को बताया ‘गुनहगार’
संजय राउत ने बेहद बड़ा बयान देते हुए यह भी कहा है कि उनकी पार्टी के साथ आज जो हो रहा है, इसका ‘गुनहगार’ सुप्रीम कोर्ट भी है. संजय राउत का दावा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया होता तो आज यह नौबत नहीं आती. उन्होंने आगे कहा कि देश में लोकतंत्र की धज्जियां उड़ रही हैं. इसका गुनहगार सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट भी है और देश का चुनाव आयोग भी है.
क्यों बागी हुए 6 सांसद?
दरअसल, बागी सांसदों ने जो प्रस्ताव दिया है, उसके हिसाब से सांसद इस आशंका से नाराज हैं कि शिवसेना यूबीटी का विलय कांग्रेस में हो सकता है. यह चिंता सांसदों ने संजय राउत के एक बयान के बयान के बाद जताई जिसमें उन्होंने कहा था ममता बनर्जी की TMC को सलाह दी थी कि कांग्रेस में विलय कर लें.
