पी चिदंबरम के बयान पर BJP का पलटवार, सुधांशु त्रिवेदी बोले- ’24 घंटे में सामने आ गया दिमागी नक्सल’
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम की टिप्पणी पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस की नक्सलवाद को लेकर सोच पर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ का मुद्दा उठाया था, लेकिन महज 24 घंटे के भीतर यह सामने आ गया कि आखिर किन लोगों के दिमाग में नक्सली विचार हैं। उन्होंने पी. चिदंबरम के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है।
कांग्रेस से BJP ने पूछा सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से सवाल किया कि नक्सलवाद को लेकर पार्टी का वास्तविक रुख क्या है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बताया था।
त्रिवेदी ने पूछा कि कांग्रेस के लिए मनमोहन सिंह का वह आकलन सही है या फिर पी. चिदंबरम का मौजूदा रुख? उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
‘रेड कॉरिडोर’ का किया जिक्र
बीजेपी नेता ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में देश के कई हिस्से नक्सली हिंसा से प्रभावित थे। उन्होंने ‘रेड कॉरिडोर’ का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय करीब 180 जिले नक्सली हिंसा से प्रभावित थे और हजारों लोगों की जान गई।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव का दावा
सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि केंद्र सरकार के प्रयासों के बाद देश में नक्सलवाद का प्रभाव तेजी से कम हुआ है। उन्होंने 31 मई 2026 को सरकार की ओर से हासिल उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि अब नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या शून्य हो गई है।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यकाल में बस्तर में आए बदलावों का भी उदाहरण दिया। त्रिवेदी ने कहा कि जिस बस्तर को कभी नक्सली हिंसा के लिए जाना जाता था, वहां अब ‘बस्तर ओलंपिक’ जैसे खेल आयोजनों के जरिए नई तस्वीर सामने आ रही है।
PM मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ पर क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में नक्सलवाद का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों का प्रभाव देश में लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन वैचारिक स्तर पर नक्सली सोच को बढ़ावा देने वाले लोगों से अभी भी सावधान रहने की जरूरत है। इसी संदर्भ में उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
पी. चिदंबरम ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी की थी। उन्होंने लिखा था कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है।
चिदंबरम की इसी टिप्पणी को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है और पार्टी से नक्सलवाद तथा उसकी वैचारिक राजनीति को लेकर स्पष्ट रुख बताने की मांग की है।
