बाइडन ने ट्रंप के TikTok बैन के फैसले को पलटा, पर चीन को राहत नहीं

बाइडन ने ट्रंप के TikTok बैन के फैसले को पलटा, पर चीन को राहत नहीं
  • बाइडेन प्रशासन ने ट्रंप का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर भले ही रद्द कर दिया है, लेकिन चीन के लिए राहत शायद ज्यादा वक्त न रहे.

वॉशिंगटन: चीन के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो सिरदर्द बने ही हुए थे. अब नए राष्ट्रपति जो बाइडन भी कम साबित नहीं होने वाले हैं. बाइडेन प्रशासन ने ट्रंप के टिक-टॉक औऱ वी चैट जैसे चीनी एप पर प्रतिबंध के फैसले को पलट दिया है. राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बुधवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें चीनी एप पर ट्रंप द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को रद्द कर दिया गया. अब अमेरिका की वाणिज्य सचिव चीनी कंपनियों के स्वामित्व वाले इन एप्स की जांच करेंगी कि क्या इनसे अमेरिकी डाटा गोपनीयता या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है.

ट्रंप के प्रतिबंध के आदेश को अदालत में चुनौती
गौरतलब है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए देश में चीनी वीडियो शेयरिंग मोबाइल एप टिकटॉक को बैन करने का फैसला किया था. इसके साथ ही कई अन्य चीनी एप्स पर भी प्रतिबंध लगाने के लिए कार्यकारी आदेश जारी किए थे. ट्रंप के इस आदेश को अदालतों में चुनौती दी गई थी और कई अदालतों में मामले अभी भी चल रहे हैं. हालांकि बुधवार को आए बाइडेन प्रशासन के कार्यकारी आदेश जारी होने के बाद ट्रंप के आदेश निष्प्रभावी हो जाएंगे. बता दें कि बाइडेन प्रशासन ने सत्ता में आने के बाद से ट्रंप प्रशासन के कई फैसले पलटे हैं जिनमें एक प्रमुख फैसला यह भी है.

फिर भी नहीं मिलने वाली चीन को राहत
हालांकि जानकार मान रहे हैं कि बाइडेन प्रशासन ने ट्रंप का एग्जीक्यूटिव ऑर्डर भले ही रद्द कर दिया है, लेकिन चीन के लिए राहत शायद ज्यादा वक्त न रहे. इसकी वजह यह है कि व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि हम दूसरे देशों से कंट्रोल होने वाले उन एप्स की बारीकी से जांच कर रहे हैं, जिनसे अमेरिका, यहां के लोगों को और उनके डाटा को खतरा हो सकता है. व्हाइट हाउस ने आगे कहा है कि इस बारे में मजबूत कदम उठाए जाएंगे, ताकि यह तय किया जा सके कि हमारे देश को दूसरे देशों से कंट्रोल होने वाले एप्स से कोई खतरा न हो. बयान में चीन का नाम भी लिया गया है.

अमेरिका समेत दुनिया में टिक-टॉक के करोड़ों यूजर्स
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने बीते साल जनवरी में वीचैट और टिकटॉक समेत 9 चीनी एप्स को बैन कर दिया था. कंपनियों ने इसे कोर्ट में चुनौती दी थी. मामला पेंडिंग है. ट्रंप ने इन्हें बैन करने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए आरोप लगाया था कि इनके जरिए चीन को अमेरिकी नागरिकों के निजी डाटा तक पहुंच मिलती है. जहां तक टिकटॉक का सवाल है, तो अमेरिका में इसके 10 करोड़ से ज्यादा यूजर हैं. बता दें कि भारत ने भी पिछले साल टिक-टॉक समेत कई चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. भारत में भी करोड़ों लोग इसका इस्तेमाल करते थे.


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