अखिलेश यादव को खटकी महिला आरक्षण पर जल्दबाजी! सपा चीफ ने कहा- ये PDA के हक को मारने की साजिश
केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को लागू कराने की क़वायद तेज कर दी है. इसके लिए तीन दिन का विशेष संसदीय सत्र बुलाया गया है. जिसे लेकर अब सियासत भी देखने को मिल रही है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी के मंशा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि ये पीडीए के हक को मारने की बड़ी साजिश है.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखी और महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बीजेपी को अब वोटरों का आकाल पड़ गया है इसलिए जल्दबाजी में इसे लाया जा रहा है लेकिन सच्चाई ये हैं कि भाजपा सरकार में महिलाएं ही सबसे ज्यादा दुखी है.
सपा अध्यक्ष ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने लिखा- ‘महिला आरक्षण के नाम पर ये जल्दीबाजी बता रही है कि अब भाजपा जा रही है. सच तो ये है कि भाजपा जनगणना को टालना चाहती है क्योंकि जनगणना होगी तो जातिगत जनगणना की भी बात उठेगी और फिर आरक्षण की भी, जो भाजपा और उनके संगी-साथी कभी भी देना नहीं चाहते हैं.
भाजपा को ये भी अच्छी तरह याद है कि ‘पीडीए’ में ‘ए’ का मतलब ‘आधी आबादी’ अर्थात् महिला भी है. ये बिल पीडीए का हक़-अधिकार मारने की एक बड़ी साज़िश का हिस्सा है.
एक बड़ा चुनावी सच ये भी है कि भाजपा की चुनावी घपलेबाजी का अब पूरी तरह से भंडाफोड़ हो गया है, ‘पीडीए प्रहरी’ एक विचार की तरह हर प्रदेश और हर दल ने स्वीकार कर लिया है. भाजपा पर चौकन्नी नज़र रखी जा रही है, इसीलिए अब भाजपा को चुनावी हेराफेरी का कोई और मौका आसानी से नहीं मिलेगा और सच्चे वोट ही, चुनाव का सच्चा नतीजा तय करेंगे.
अब हर तरह से भाजपा की कलई खुल गयी है, इसीलिए उसके समर्थक और वोटरों का अकाल पड़ गया है. भाजपा निराशा के इस दौर से उबरने के लिए ये बिल ला रही है. भाजपा की यही राजनीतिक चाल रहती है जब पुराने लोग ये समझ जाते हैं कि भाजपा किसी की सगी नहीं है तो हर बार भाजपा कुछ नये लोगों को अपने लुभावने जुमलों में फँसाती है.
इस बार भाजपा महिलाओं को लेकर ये पुरानी चाल चल रही है लेकिन, सफल नहीं होगी क्योंकि भाजपा राज में सबसे ज़्यादा दुखी तो महिलाएं ही हैं. भाजपा की कमीशनखोरी व चंदा वसूली की वजह से जो महंगाई बढ़ी है उससे उनकी रसोई सूनी हो गयी है, रही-सही कसर सिलेंडर की बेतहाशा बढ़ती क़ीमतों ने पूरी कर दी है.
हर महिला अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती है लेकिन भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच तो सरकारी स्कूल तक बंद करवा दे रही है. महिलाओं का दर्द क्या होता है ये मेरठ के दुकानदारों के परिवार की महिलाओं की आँखों में आए आँसू भी बयां कर रहे हैं और नोएडा की मजदूर और मेड के रूँधे गले के बयान भी.
अगर ये बिल इतना ही सही है तो इसे मेरठ-नोएडा की पारिवारिक और कामगार महिलाओं के बीच बैठकर घोषित किया जाए.’
