महापौर ने किया लोक संगीत की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान

महापौर ने किया लोक संगीत की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान
सहारनपुर में मेला गुघाल की लोक संगीत संध्या का रिबन काटकर शुभारंभ करते महापौर डॉ. अजय कुमार व अन्य।

मेला गुघाल की सांस्कृतिक श्रृंखला में सजी लोक संगीत संध्या, कलाकारों ने बांधा समां

सहारनपुर। मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत जीआईसी सभागार में नगर निगम की ओर से भव्य लोक संगीत संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकगीतों और पारंपरिक संगीत की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान महापौर डॉ. अजय कुमार ने युवाओं से लोक संगीत, कला और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का ज्ञान अर्जित कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व विधायक रवीन्द्र कुमार मोल्हू, पाल समाज के संरक्षक बलजीत चौधरी, मेला चेयरमैन पार्षद संजय सैनी, मेला आयोजन समिति अध्यक्ष पार्षद दिग्विजय चौहान, दल नेता एवं पार्षद राजेंद्र कोहली, पूर्व उपसभापति मुकेश गक्खड़, सह संयोजक ज्योति अग्रवाल, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री नूतन शर्मा, पूर्व महानगर अध्यक्ष हेमंत अरोड़ा, कार्यक्रम संयोजक सोपिन पाल, पार्षद अरुण गुप्ता और महानगर महामंत्री किशोर शर्मा ने भारत माता एवं माता अहिल्याबाई के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।

इसके बाद महापौर डॉ. अजय कुमार सहित पार्षद मुरारी खेतवाल, नीरज शर्मा, सलेखचंद, महानगर महामंत्री ललित कटारिया, मंडल अध्यक्ष जोगेंद्र लाला, पार्षद प्रतिनिधि नीरज दिवाकर, राकेश कल्याण, नितिन जाटव, अनिल शर्मा, भाजपा नेत्री सरोज शर्मा, विक्रम शर्मा और राजीव गुप्ता ने रिबन काटकर लोक संगीत संध्या का औपचारिक शुभारंभ किया।

कार्यक्रम संयोजक सोपिन पाल और सह संयोजक जोगेंद्र लाला ने सभी अतिथियों एवं पार्षदों का पटका पहनाकर स्वागत किया। अयोध्या से पहुंचे कलाकार सत्यांशु पटेल ने दुर्गा स्तुति से सांस्कृतिक संध्या का आगाज किया। इसके बाद उन्होंने अपने साथी कलाकारों के साथ एक से बढ़कर एक लोकगीत, भजन और गजल प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।

सत्यांशु पटेल ने ‘रामजी के नमवा के ना जाने ला’, ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान…’, ‘कान्हा-कान्हा रटेली राधा प्यारी’ सहित कई प्रस्तुतियां दीं। इसके अलावा ‘मिर्जापुर कइला गुलजार…’ और ‘ए सजनी ए सजनी…’ जैसे लोकगीतों ने भी श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं गजल ‘किसको दिल दिया जाए सोचना जहरीले…’ को भी खूब सराहना मिली।

संध्या का विशेष आकर्षण सत्यांशु पटेल की प्रस्तुति ‘जरा देर ठहरो राम, तमन्ना यही है, अभी हमने जीभर के देखा नहीं है’ रही। इस प्रस्तुति के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

संगीत में ढोलक पर अमित कुमार, की-बोर्ड एवं बैंजो पर धर्मेंद्र सिंह, पैड पर विख्यात मिश्रा और सहगायन में अमन शर्मा ने कलाकारों का भरपूर साथ दिया।

लोक संगीत हमारी सांस्कृतिक पहचान : महापौर

महापौर डॉ. अजय कुमार ने कहा कि लोक संगीत हमारी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने युवाओं से लोकगीतों, कला-संगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के बारे में जानकारी हासिल करने तथा इस विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि लोक संगीत की जड़ें हमारी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी हैं, लेकिन आधुनिक दौर में यह विरासत धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही है। समाज को लोक संगीत के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ही मेला गुघाल में लोक संगीत संध्या का आयोजन किया गया है।

महापौर ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए आधुनिक विकास के साथ अपनी संस्कृति और विरासत को भी साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़कर ही आने वाली पीढ़ियों को समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सौंपी जा सकती है।

कार्यक्रम का संचालन जोगेंद्र लाला ने किया।

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