SIR विवाद पर अभिषेक मनु सिंघवी बोले- ‘चुनाव आयोग के अंदर भी बुलडोजर’
चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताए जाने का हवाला दिया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई कदमों पर रिकॉर्ड में आपत्तियां दर्ज की थीं.
सिंघवी बोले- बीजेपी ने खोला है लोकतंत्र की हत्या का कार्यालय
अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि “बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या का कार्यालय खोला है.” उन्होंने कहा कि एक तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त और दूसरी तरफ गृह मंत्रालय को रखा गया है. सिंघवी ने कहा कि वह पहले से ही एक “बाहरी बुलडोजर” के बारे में जानते हैं और आरोप लगाया कि विभिन्न संस्थाओं पर उसका असर देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के अंदर भी एक “आंतरिक बुलडोजर” मौजूद है. सिंघवी ने इसे दो बुलडोजरों की स्थिति बताते हुए कहा कि इसका असर लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए गंभीर हो सकता है.
बोले- सभी चुनाव आयुक्त बराबर, सीईसी सिर्फ ‘बराबर वालों में पहला’
सिंघवी ने कहा कि कई साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है और सभी चुनाव आयुक्त बराबर होते हैं. उनके मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त दूसरे चुनाव आयुक्तों से ऊपर नहीं हैं, बल्कि वह “बराबर वालों में पहले” हैं. उन्होंने कहा कि आज सामने आई रिपोर्ट से यह सवाल उठता है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने सिर्फ देश के लोगों को ही नहीं, बल्कि अपने साथ काम करने वाले चुनाव आयुक्तों को भी गुमराह किया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं को जोड़ने, नाम हटाने और मतदाता डेटाबेस से जुड़े कई कदमों पर आपत्तियां दर्ज की थीं.
सिंघवी की मांग- सभी असहमति वाले नोट सार्वजनिक करे चुनाव आयोग
सिंघवी ने चुनाव आयोग से दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज किए गए सभी डिसेंट नोट यानी असहमति संबंधी टिप्पणियों को सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने कहा कि जनता को यह पता चलना चाहिए कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने किन मुद्दों पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने विशेष रूप से फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जिक्र किया. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, फॉर्म-6 में एसआईआर से संबंधित घोषणा जोड़ी गई थी और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की थी.
फॉर्म-6 पर भी उठाए सवाल
सिंघवी ने कहा कि फॉर्म-6 के तहत यह महत्वपूर्ण बनाया जा रहा है कि आवेदक के माता-पिता या दादा-दादी पुराने एसआईआर में मतदाता सूची में थे या नहीं. उन्होंने सवाल उठाया कि इसके अलावा अन्य दस्तावेजों की क्या भूमिका रह जाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बदलावों को लेकर चुनाव आयुक्तों ने लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को “अनधिकृत” और “अवैध” बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी.
ERO को एक्सेस नहीं मिलने का भी दावा
सिंघवी ने दावा किया कि हजारों चुनाव पंजीकरण अधिकारियों यानी ईआरओ ने शिकायत की है कि उन्हें जरूरी सिस्टम का एक्सेस नहीं मिल रहा है. उन्होंने इसे मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए सवाल उठाया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी मतदाता डेटाबेस और सॉफ्टवेयर के नियंत्रण को लेकर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख है. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने डेटाबेस तक पहुंच को दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने को लेकर भी चिंता जताई थी.
पश्चिम बंगाल में अपील के आंकड़ों का भी जिक्र
सिंघवी ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद बड़ी संख्या में लोगों के अपील में जाने का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि करीब 38 लाख मामलों में लोग अपील की प्रक्रिया में गए हैं और इनमें करीब 16 लाख अपील चुनाव आयोग से संबंधित हैं. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से ज्यादा लोगों ने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील की है. कुल अपीलों की संख्या 38.31 लाख बताई गई है, जिसमें नाम शामिल करने और हटाने से जुड़ी अपीलें शामिल हैं.
सिंघवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिंघवी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठाया और उनके इस्तीफे की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो रही है और जहां सत्ता पक्ष चुनाव नहीं जीतता, वहां दलबदल जैसे राजनीतिक घटनाक्रम सामने आते हैं. हालांकि, ये सिंघवी के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता. चुनाव आयोग की ओर से एसआईआर प्रक्रिया और संबंधित आपत्तियों पर अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं.
इंडिया गठबंधन के साथ बैठक कर आगे की रणनीति पर फैसला
सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ बैठक करेगी और इसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी. उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और दोनों चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों को लेकर विपक्ष आगे भी अपना पक्ष रखेगा. वहीं, एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली में जारी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. 22 सितंबर को अदालत ने कहा था कि कुछ नोटिस “यांत्रिक तरीके से” जारी किए गए प्रतीत होते हैं और चुनाव आयोग से इस पर जवाब मांगा था.
