स्पेशल कोर्ट का मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट केस में निर्देश, लोकायुक्त पुलिस से मांगी रिपोर्ट
New Delhi : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की बेंगलुरू में सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट में कथित भ्रष्टाचार और सार्वजनिक पद के दुरुपयोग मामले में परेशानी बढ़ गई है. स्पेशल कोर्ट ने सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट मामले में मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस के एसपी को शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया है. अदालत ने राज्य लोकायुक्त एसपी को नोटिस जारी किया है. अदालत ने निर्देश दिए हैं कि 6 अक्टूबर तक इस मामले में रिपोर्ट जमा करें जब इस मामले की अगली सुनवाई होगी. मल्लिकार्जुन खरगे इस समय राज्य सभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष हैं.
विशेष अदालत ने लोकायुक्त पुलिस को आदेश दिए गए हैं कि खरगे, उनके बेटे और उनके अन्य रिश्तेदारों के सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में कनेक्शन की जांच की जाए. ये मामला तब शुरू हुआ जब विजयराघव मराठे ने एक निजी शिकायत में आरोप लगाए कि सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के ऑफिस का इस्तेमाल मल्लिकार्जुन खरगे ने निजी उपयोग के लिए किया.
अतिरिक्त सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता KRS (कर्नाटक राष्ट्र समिति) के विजयराघव मराठे ने अपने हलफनामे में दी गई दिक्कत को दूर कर लिया है और अब इस मामले की कार्रवाई को आगे बढ़ाने में कोई परेशानी नहीं है. ये निर्देश उसी के बाद जारी किया गया.
सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट विवाद क्या है और कितना पुराना है ट्रस्ट?
मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ भ्रष्टाचार और सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के ऑफिस का गलत उपयोग करने के आरोप हैं. इसमें वो और उनके बेटे कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे न्यासी (Trustee) हैं. इस मामले में बेंगलौर डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों की भी मिलीभगत के आरोप लगे हैं. सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट की स्थापना 1994 में मल्लिकार्जुन खरगे ने 5 ट्रस्ट्री के साथ मिलकर की थी.
मामले में कब क्या हुआ (Timeline)
स्पेशल कोर्ट ने 18 सितंबर को सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट मामले में मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस को शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया. इससे पहले शिकायतकर्ता विजयराघव मराठे ने 10 सितंबर को एफिडेविट के साथ कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी जमा की.
स्पेशल कोर्ट ने माना कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी 18 अगस्त के अपने आदेश में पहले के निर्देश को रद्द किया था. ये आदेश भारतीय नागरिक संहिता (BNSS) के तहत दिया गया था.
इससे पहले 11 अगस्त के प्रथम दृष्टया आदेश से ये पता चलता है कि शिकायतकर्ता विजयराघव मराठे के हलफनामे में मौजूद कमी को ठीक करने के बाद उसे सुधारने का मौका दिया जा सकता है. इसके बाद इस मामले को धारा 175 के तहत कार्यवाही के लिए वापस भेज दिया गया था.
