न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर मस्जिद ढहाई गई: महमूद मदनी
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष व पूर्व राज्यसभा सांसद मौलाना महमूद मदनी ने सहारनपुर कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के विध्वंस को लेकर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मदनी ने आरोप लगाया कि न्यायिक प्रक्रिया का पूरा अवसर दिए बिना मस्जिद को रात के अंधेरे में ध्वस्त किया गया।
मौलाना महमूद मदनी ने रविवार को जारी बयान में कहा कि विवादित भूमि कलक्ट्रेट परिसर से संबंधित होने के कारण प्रशासन स्वयं इस मामले में एक पक्ष था। ऐसे में उसी प्रशासन द्वारा एकतरफा निर्णय लेकर कार्रवाई किया जाना न्याय के बुनियादी सिद्धांतों पर सवाल खड़े करता है। कानून का सामान्य सिद्धांत है कि कोई भी पक्ष अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि चार सितंबर को निचली अदालत का फैसला आया था, लेकिन उसमें मस्जिद को तत्काल ध्वस्त करने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं था। इसके बावजूद प्रभावित पक्ष को कानूनी उपाय अपनाने का अवसर दिए बिना और फैसले की प्रमाणित प्रति उपलब्ध होने से पहले ही कुछ घंटों के भीतर मस्जिद को बुलडोजर से ढहा दिया गया। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि निचली अदालत का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम चरण नहीं है। संबंधित पक्ष को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपील का सांविधानिक अधिकार है। कहा कि जब किसी कार्रवाई से हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होती, तब कानूनी उपाय के लिए पर्याप्त समय दिया जाना न्याय का तकाजा है। मदनी ने मस्जिद कमेटी और कानूनी विशेषज्ञों से बिना देरी किए उच्च न्यायालय का रुख करने की अपील की। साथ ही प्रशासन की कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा कराने और कथित शक्ति के दुरुपयोग की जांच की मांग की।
