छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करने को केंद्र की SC में अर्जी, CJP ने कसा तंज; अभिजीत दीपके ने शेयर की आंबेडकर की तस्वीर
नई दिल्ली: परीक्षा पेपर लीक और छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सामान्य छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र ने अदालत से विशेष संवैधानिक शक्ति अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों में FIR रद्द करने की मांग की है। केंद्र के इस कदम पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने भी प्रतिक्रिया दी है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र के फैसले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर साझा की। वहीं, पार्टी प्रवक्ता सौरभ दास ने काला चश्मा लगाए अपनी तस्वीर पोस्ट करते हुए प्रतिक्रिया दी।
केंद्र ने SC से की FIR रद्द करने की मांग
भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। जब CJI ने याचिका के विषय के बारे में पूछा तो सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि यह छात्र प्रदर्शनों के दौरान दर्ज की गई FIR को रद्द करने से संबंधित है।
उन्होंने कहा कि केंद्र इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने का अनुरोध कर रहा है।
CJI ने सॉलिसिटर जनरल से याचिका दाखिल करने को कहा। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि दोनों पक्ष मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो अदालत को इसमें आपत्ति नहीं होगी।
CJP के 5 सितंबर के प्रदर्शन से पहले बड़ा कदम
केंद्र का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। CJP का आरोप है कि जुलाई में पेपर लीक के खिलाफ हुए देशव्यापी छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने का केंद्र सरकार ने वादा किया था, लेकिन अब तक उस पर पूरी तरह अमल नहीं हुआ।
बताया गया है कि 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त करने की प्रमुख शर्तों में छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना भी शामिल था। अब केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट में FIR रद्द करने की मांग किए जाने को इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गंभीर अपराधों के मामलों को राहत से बाहर रखने की बात
सुप्रीम कोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से यह संकेत दिया गया था कि अदालत अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को समाप्त करने पर विचार कर सकती है।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया था कि FIR वापस लेने की सामान्य प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। इसके लिए संबंधित मामलों में मजिस्ट्रेट के सामने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करनी पड़ती है और मजिस्ट्रेट के पास उस रिपोर्ट को स्वीकार या खारिज करने का अधिकार होता है।
पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि हत्या, दुष्कर्म और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों में आरोपी करीब 2,873 लोगों को छोड़कर बाकी छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की जा सकती हैं।
सरकार ने यह भी कहा था कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ में शामिल हुए कथित असामाजिक तत्वों की अलग से जांच की जानी चाहिए।
केंद्र की नई याचिका और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई अब इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि एक ओर छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया हुआ है।
