मजाक बनकर रह गई CBSE North Zone-1 की अंडर-14 क्रिकेट प्रतियोगिता?
780 पंजीकरण, 206 खिलाड़ी शॉर्टलिस्ट; असमान अवसर और पक्षपात के गंभीर आरोप
जसपुर, उत्तराखंड। बच्चों की क्रिकेट प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से आयोजित सीबीएसई नॉर्थ जोन-1 अंडर-14 बालक क्रिकेट प्रतियोगिता की चयन प्रक्रिया गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। अभिभावकों और प्रतिभागी खिलाड़ियों ने चयन में मनमानी, असमान अवसर और पक्षपात किए जाने के आरोप लगाए हैं।
सीबीएसई के आधिकारिक खेल कैलेंडर के अनुसार प्रतियोगिता 14 से 17 अगस्त 2026 तक जसपुर स्थित ब्राइट स्टार्ट इंटरनेशनल एकेडमी में आयोजित की गई।
780 में से 206 खिलाड़ी किए गए थे शॉर्टलिस्ट
शिकायतकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार प्रतियोगिता के लिए कुल 780 बच्चों ने पंजीकरण कराया था। पहले चरण के ट्रायल के बाद इनमें से 206 खिलाड़ियों को अगले दौर के लिए चुना गया।
चयनित खिलाड़ियों का वर्गीकरण इस प्रकार बताया गया है—
- बल्लेबाज: 81
- तेज गेंदबाज: 64
- स्पिन गेंदबाज: 49
- विकेटकीपर: 12
- कुल खिलाड़ी: 206
इन आंकड़ों के अनुसार 206 खिलाड़ियों में 113 गेंदबाज शामिल थे, जबकि बल्लेबाजों की संख्या केवल 81 थी। अभिभावकों का कहना है कि चयनित खिलाड़ियों का यह अनुपात क्रिकेट टीम की सामान्य जरूरतों के अनुरूप संतुलित दिखाई नहीं देता।
सामान्यतः एक संतुलित प्लेइंग इलेवन में लगभग पांच बल्लेबाज, एक विकेटकीपर-बल्लेबाज और पांच गेंदबाज अथवा ऑलराउंडर रखे जाते हैं। हालांकि टीम संयोजन परिस्थितियों और खिलाड़ियों की ऑलराउंड क्षमता पर निर्भर करता है, लेकिन अभिभावकों का सवाल है कि शुरुआती चयन में बल्लेबाजों के मुकाबले इतनी अधिक संख्या में गेंदबाज क्यों चुने गए?
क्या दूसरे चरण में बच्चों को बाहर करने की थी तैयारी?
अभिभावकों ने आशंका जताई है कि पहले चरण में अधिक संख्या में गेंदबाजों को चुनने के बाद दूसरे चरण में “टीम संतुलन” का आधार बनाकर बड़ी संख्या में बच्चों को बाहर किया जा सकता था।
उनका कहना है कि चयनित बच्चों को अभ्यास मैचों में खेलने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए था। मैच के दौरान प्रदर्शन के आधार पर ही अगले चरण का चयन किया जाना अधिक पारदर्शी तरीका होता। आरोप है कि कई चयनित खिलाड़ियों को एक भी मैच खेलने का अवसर नहीं दिया गया और इसके बजाय इनडोर अथवा नेट पर दोबारा ट्रायल लिया गया।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि खिलाड़ियों को उनके वास्तविक मैच प्रदर्शन के आधार पर परखा ही नहीं गया, तो अंतिम चयन का आधार क्या था?
किसी को 15 गेंदें, किसी को सिर्फ पांच!
ट्रायल देकर बाहर आए कई बच्चों ने अपने अभिभावकों को बताया कि मैदान के अंदर चार नेट लगाए गए थे, लेकिन चयनकर्ता प्रत्येक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर बराबर ध्यान नहीं दे रहे थे।
आरोप है कि कुछ बच्चों को 12 से 15 गेंदें खेलने का अवसर मिला, जबकि कई बच्चों को केवल पांच या छह गेंदें खिलाकर वापस भेज दिया गया। गेंदबाजों को भी कथित रूप से समान संख्या में गेंदें डालने का अवसर नहीं मिला।
अभिभावकों का कहना है कि पांच या छह गेंदों में किसी अंडर-14 खिलाड़ी की बल्लेबाजी क्षमता, तकनीक, आत्मविश्वास और मैच समझ का निष्पक्ष आकलन करना संभव नहीं है। सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए बच्चों को यदि कुछ मिनट और कुछ गेंदों के आधार पर बाहर कर दिया गया, तो यह उनकी मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
कई दिन पहले बुलाने से बढ़ा आर्थिक बोझ
प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए कई खिलाड़ी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के दूर-दराज क्षेत्रों से जसपुर पहुंचे थे। अभिभावकों का आरोप है कि खिलाड़ियों को प्रतियोगिता शुरू होने से कई दिन पहले बुला लिया गया।
इसके कारण परिवारों को यात्रा, होटल और भोजन पर काफी पैसा खर्च करना पड़ा। जसपुर में कई दिनों तक रहने और खाने की व्यवस्था महंगी पड़ने से अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। इसके बावजूद बच्चों को पर्याप्त मैच अथवा ट्रायल का अवसर नहीं मिलने से उनमें निराशा है।
कुछ अभिभावकों और कोचों को अंदर जाने की अनुमति कैसे मिली?
चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सबसे गंभीर सवाल ट्रायल स्थल पर प्रवेश व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। अभिभावकों के अनुसार सामान्य खिलाड़ियों के माता-पिता और कोचों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
इसके विपरीत कुछ अभिभावकों और कोचों को कथित रूप से ट्रायल स्थल के अंदर प्रवेश दिया गया। आरोप यह भी है कि उनके लिए चाय-नाश्ते की व्यवस्था की गई। जब अन्य अभिभावकों ने इस असमान व्यवस्था के बारे में स्टाफ से पूछा तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
अभिभावकों का कहना है कि यदि ट्रायल स्थल पर बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित था, तो कुछ चुनिंदा व्यक्तियों को अंदर जाने की अनुमति किस आधार पर दी गई? क्या उनके प्रवेश का कोई लिखित रिकॉर्ड तैयार किया गया था?
चयन प्रक्रिया से जुड़े प्रमुख सवाल
पूरे मामले में आयोजन समिति और चयनकर्ताओं से कई सवालों के जवाब अपेक्षित हैं—
- 780 खिलाड़ियों में से 206 को चुनने का निर्धारित मापदंड क्या था?
- क्या प्रत्येक खिलाड़ी की स्कोर शीट या मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की गई?
- सभी बल्लेबाजों और गेंदबाजों को समान अवसर क्यों नहीं दिया गया?
- चयनित खिलाड़ियों को अभ्यास मैचों में क्यों नहीं खिलाया गया?
- कुछ अभिभावकों और कोचों को ट्रायल स्थल के अंदर प्रवेश कैसे मिला?
- चयनकर्ताओं ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन का रिकॉर्ड किस प्रकार रखा?
- चयन प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई या नहीं?
- असंतुष्ट खिलाड़ियों और अभिभावकों के लिए शिकायत अथवा अपील की क्या व्यवस्था है?
निष्पक्ष जांच और रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
अभिभावकों ने सीबीएसई से पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि चयनकर्ताओं की मूल्यांकन शीट, खिलाड़ियों को मिले अवसर, मैचों में प्रदर्शन और अंतिम चयन के मापदंड सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
यदि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष थी, तो संबंधित रिकॉर्ड सामने आने से सभी संदेह दूर हो जाएंगे। लेकिन यदि किसी खिलाड़ी को प्रभाव, पहचान या पक्षपात के आधार पर अतिरिक्त अवसर दिया गया, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह मामला केवल कुछ बच्चों के चयन या बाहर होने तक सीमित नहीं है। सवाल उन सैकड़ों बच्चों की मेहनत, समय, सपनों और अभिभावकों द्वारा खर्च किए गए धन का है, जो निष्पक्ष अवसर मिलने की उम्मीद में कई सौ किलोमीटर दूर से जसपुर पहुंचे थे।
समाचार लिखे जाने तक चयन प्रक्रिया से जुड़े इन आरोपों पर सीबीएसई, आयोजन समिति अथवा संबंधित विद्यालय का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
