जंतर मंतर को लेकर गृहमंत्रालय का बड़ा आदेश, डेढ़ किमी के दायरे में बंद रहेगी मोबाइल इंटरनेट सर्विस
गृह मंत्रालय ने जंतर मंतर को लेकर बड़ा आदेश जारी किया है. विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने 23 जुलाई को जंतर मंतर के डेढ़ किमी के दायरे में शाम 4 बजे से आधी रात 12 बजे तक इंटरनेट सर्विस बंद करने को कहा है. सीजेपी के समर्थन में जारी प्रदर्शन को लेकर पूरे देश से युवा जुटे हुए हैं.
गृह मंत्रालय का यह आदेश गुरुवार को आया है. इसमें सीजेपी के प्रोटेस्ट से जुड़ी हिंसा की छुटपुट घटनाओं के बाद सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए इस फैसले को लिया है. इससे सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत पुलिस ने विरोध स्थल के आसपास मोबाइल जैमर चालू कर दिए थे. यह फैसले सेंट्रल दिल्ली में हिंसा की कई घटनाओं के बाद लिया गया. इसमें दो एसीपी रैंक के अधिकारियों समेत कम से कम 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए.
मंगलवार को कनॉट प्लेस में विरोध कर रही भीड़ ने कथित तौर पर रैपिड एक्शन फोर्स के 45 साल के जवान पर तलवारों और लाठियों से हमला भी किया था. इंटरनेट सर्विस बंद करने का फैसला इन्हीं सारी आशंकाओं के बाद लिया है.
कनॉट प्लेस में दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान बंद करने के निर्देश
इसके अलावा कनॉट प्लेस में दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान शाम 6:30 बजे तक बंद हो जाएंगे. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन की सलाह के बाद गुरुवार को कनॉट प्लेस में दुकानें, ऑफिस और रेस्टोरेंट शाम 6:30 बजे तक बंद कर दिए जाएंगे. यह सलाह इलाके के कमर्शियल प्रतिष्ठानों को तब दी गई जब एसोसिएशन को न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) के चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन से फोन पर निर्देश मिला कि वे शाम 6.30 बजे तक अपना कामकाज बंद कर दें. ट्रेडर्स एसोसिएशन ने दुकान मालिकों, ऑफिस और रेस्टोरेंट से सहयोग करने और निर्देशों का पालन करने की अपील की. उन्होंने कनॉट प्लेस के आस-पास चल रहे CJP विरोध प्रदर्शन के कारण बनी गंभीर स्थिति का हवाला दिया.
इसके अलावा सलाह में कहा गया है कि यह एहतियाती कदम किसी भी अप्रिय घटना, संपत्ति के नुकसान या चोट को रोकने के लिए उठाया गया है.
NIA की जांच मांग वाली पीटिशन पर सीजेपी का आया बयान
इधर, जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट कर रहे सीजेपी के प्रवक्ता ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि किसी दक्षिणपंथी विचारधारा वाले व्यक्ति की ओर से सीजेपी के खिलाफ एनआईए जांच की मांग वाली पीआईएल बहुत संदिग्ध है. हम कोर्ट से गुजारिश करते हैं कि वे इस सरकार के हाथों का हथियार बनें. पूरी युवा पीढ़ी उनकी ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है. सोनम वांगचुक की सेहत से जुड़ी एक पीआईएल पर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का इस्तेमाल कर उन्हें जबरदस्ती हटाने और अस्पताल में नजरबंद करने के लिए किया था. इससे विरोध और भड़क गया है.
उन्होंने कहा कि सरकार फिर से इस पीआईएल और कोर्ट का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों, स्टूडेंट और युवा पीढ़ी को बदनाम करने और असहमति को बेरहमी से दबाने के लिए करेगी. यह सब प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की बजाय किया जाएगा. कोर्ट को सत्ताधारी सरकार की ऐसी खतरनाक और बुरी साजिश का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता. संस्थाओं में भरोसा जरूरी है. उन्हें किसी भी तरह से राजनीति का अखाड़ा या हथियार न बनने दें.
