हिरासत में लिए गए CJP नेता तो शशि थरूर बोले – ‘जो सरकार आश्वस्त होती है…’
कांग्रेस सांसद शथि थरूर ने एक्स पर पोस्ट में कहा, मैं रात 2 बजे के बाद राष्ट्रीय राजधानी लौटा और मैंने दिल्ली में जो हालात देखे हैं, वैसे हालात पहले कभी नहीं देखे. हर कुछ सौ मीटर पर चौकियाँ बनी हुई हैं, सड़कों पर कंक्रीट की बैरिकेड्स और स्पाइक स्ट्रिप्स बिछाई गई हैं, पूरे शहर में 22,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की युद्ध जैसी तैनाती है, 250 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं और 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं. दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरें आ रही हैं – ये सब नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से रोकने के लिए किया जा रहा है. सबसे प्रतिगामी (और दमनकारी) कदम राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में इंटरनेट का बंद होना है.
आवागमन की स्वतंत्रता पूरी तरह से ठप है. जंतर-मंतर को ठीक इसी उद्देश्य से नामित किया गया था कि नागरिक दिल्ली के केंद्र में असहमति व्यक्त कर सकें, और आज तो वहां तक जाने वाली सड़कों को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है. यह सवाल पूछना स्वाभाविक है कि जब हमारी राजधानी में महिलाओं को सुरक्षा की जरूरत होती है, तो यह असाधारण जनशक्ति और तत्परता कहाँ गायब हो जाती है.
गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा करना होगा. और अगर प्रदर्शनकारी सोमवार को फिर से लौट आते हैं, तो क्या अधिकारी राष्ट्रीय राजधानी को दोबारा बंद कर देंगे? हमारी पीढ़ी को एक अघोषित उभरती पीढ़ी से बेहतर व्यवस्था मिलनी चाहिए.
चुनावों की निष्पक्षता पर भरोसा रखने वाली सरकार उनका स्वागत करेगी, जबकि राजधानी को किले में बदलने वाली सरकार केवल उन संदेहों को और गहरा करती है जिन्हें वह दबाना चाहती है. सरकार को जवाब देने चाहिए, लाठीचार्ज नहीं; अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देनी चाहिए, दमन नहीं.
बैरिकेड लगाने से चुनाव आयोग में विश्वास बहाल नहीं होगा, और जितनी जल्दी आयोग जनता के सवालों का जवाब देगा, उतनी ही जल्दी शांति बहाल होगी. लोकतंत्र की ताकत इस बात से मापी जाती है कि वह अपने कामकाज पर सवाल उठाने वालों के साथ कैसा व्यवहार करता है, और इस पैमाने पर, आज हमने जो देखा है वह बेहद शर्मनाक और अमानवीय है.
