‘दिल्ली में इतनी…’, CJP प्रदर्शन पर कांग्रेस ने किया सवाल

‘दिल्ली में इतनी…’, CJP प्रदर्शन पर कांग्रेस ने किया सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा पाबंदियों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने आरोप लगाया कि देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें राजनीतिक दलों और संगठनों को अपनी बात रखने तथा आंदोलन करने से रोका जा रहा है.

कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग से जवाब मांगना अपराध है और क्या शांतिपूर्ण विरोध करना देशद्रोह हो गया है? कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की.

आराधना मिश्रा बोलीं- यह डरी हुई भाजपा की तस्वीर

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से पहले लगाई गई सुरक्षा पाबंदियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह पूरी तरह से डरी हुई भारतीय जनता पार्टी की तस्वीर है.” उन्होंने कहा कि देश का संविधान हर राजनीतिक दल, संगठन और व्यक्ति को आंदोलन करने तथा अपनी बात रखने का अधिकार देता है.

आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि मौजूदा माहौल में ट्रेनें रद्द की जा रही हैं, टोल पर गाड़ियों को रोका जा रहा है और लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है. उनके मुताबिक, यह लोकतंत्र की हत्या करने का प्रयास है. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे अब मालूम हो गया है कि उसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है और वह सत्ता में रहने वाली नहीं है.

राहुल गांधी चेन्नई में रहेंगे, कांग्रेस के शामिल होने पर दिया जवाब

सीजेपी के विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस की भागीदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि राहुल गांधी का पहले से निर्धारित कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ चेन्नई में है. उन्होंने बताया कि कांग्रेस का नेतृत्व उस कार्यक्रम में मौजूद रहेगा. उनके इस बयान के बीच दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन और उसमें विपक्षी दलों की भागीदारी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है.

सुरजेवाला ने पूछा- क्या चुनाव आयोग से जवाब मांगना अपराध है?

कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दिल्ली में सुरक्षा पाबंदियों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “क्या ये डेमोक्रेटिक इंडिया है? क्या दिल्ली में संविधान का शासन बचा है? क्या चुनाव आयोग से जवाब मांगना अपराध है? क्या शांतिप्रिय विरोध अब देशद्रोह है? क्या मोदी सरकार से न्याय मांगना जुर्म है?”

उन्होंने कहा कि अब हर भारतीय को ये सवाल पूछने होंगे. सुरजेवाला ने कहा कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि कोई अधिकारी, कारोबारी, न्यायाधीश, दुकानदार, विद्यार्थी, गृहिणी, मजदूर, कामगार या ऑटो रिक्शा चालक है. हर व्यक्ति भारतीय है और उसे इन सवालों के जवाब मांगने का अधिकार है.

राहुल गांधी और सांसदों के साथ कार्रवाई का लगाया आरोप

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि पिछले तीन दिनों से दिल्ली में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सांसदों को सड़कों पर पीटा जा रहा है, घसीटा जा रहा है और गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्षी नेता चुनाव आयोग जाना चाहते थे, तो उन्हें ऐसा करने से क्यों रोका गया. उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से इस पर जवाब मांगा. उन्होंने दिल्ली की सीमाएं सील किए जाने और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती पर भी सवाल उठाए. सुरजेवाला ने दावा किया कि दिल्ली में करीब 40 से 50 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

उन्होंने मेट्रो सेवाओं और दिल्ली आने वाली ट्रेनों पर प्रतिबंधों को लेकर भी सरकार को घेरा. सुरजेवाला ने सवाल किया कि जब कोई महामारी या विदेशी हमला नहीं हुआ है, तो सार्वजनिक परिवहन को प्रभावित करने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव आयोग की जवाबदेही तय किए जाने की मांग से डर रही है. सुरजेवाला ने यह भी दावा किया कि दिल्ली के होटलों को खाली कराया जा रहा है, अदालतों में ऑनलाइन सुनवाई हो रही है और रेस्तरां लगभग बंद हैं. उन्होंने कहा कि जब कोई सरकार अपने ही लोगों से डरने लगे, तो उसे शासन करने का अधिकार नहीं रह जाता.

जयराम रमेश बोले- दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया गया

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि देश की राजधानी को किले में तब्दील कर दिया गया है और हर तरफ हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मताधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर चिंतित युवाओं के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी घबराई हुई है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत मिले मतदान के अधिकार को सुनियोजित तरीके से छीनने की कोशिश की जा रही है.

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर रद्द करने की मांग

जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और उन्हें मिले कानूनी संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने अपनी नियुक्ति के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों का पूरी वफादारी से पालन किया. उन्होंने दिसंबर 2023 में विपक्ष के 145 सांसदों के निलंबन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उसी दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त सहित निर्वाचन आयोग के सदस्यों को कानूनी संरक्षण देने वाला कानून संसद में पारित कराया गया था. जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे को नैतिक अनिवार्यता बताया.

उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने की दिशा में पहला कदम होगा. इसके साथ ही उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोकने और रद्द करने की मांग की. जयराम रमेश का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए अब तक करीब 14 करोड़ भारतीयों से उनका मताधिकार छीना जा चुका है. उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था में जनता का भरोसा बहाल करने के लिए एसआईआर को रद्द करना जरूरी है. उनके मुताबिक, लोकतंत्र की बुनियाद को फिर से मजबूत करना सभी नागरिकों, खासकर युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है.

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