UCC को लेकर बीजेपी-RSS पर बरसे सपा सांसद, बोले- ‘ठेकेदार बन गए…’

UCC को लेकर बीजेपी-RSS पर बरसे सपा सांसद, बोले- ‘ठेकेदार बन गए…’

समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह  नदवी ने बीजेपी और आरएसएस पर तीखे सवाल उठाए. उन्होंने देश की विविधता, अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक परंपराओं, मस्जिदों के दस्तावेज, कश्मीर और हिंदू-मुस्लिम एकता समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. नदवी रामपुर से समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद हैं.

मोहिबुल्लाह  नदवी ने कहा, “बीजेपी के एक खास अनरजिस्टर्ड समूह के लोगों ने पीछे से, पर्दे के पीछे से देश की संस्थाओं को कमजोर किया और उनमें अपने विचार और अपनी विचारधारा के लोगों को शामिल किया. यह अपने आप में एक प्रक्रिया है. अनरजिस्टर्ड रहकर ऐसा करना देश के साथ बेवफाई और अत्याचार की सबसे बड़ी मिसाल है.”

उन्होंने आगे कहा, “जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सबसे बड़े नेताओं में से एक, देश के महान नेता महात्मा गांधी को गोली मारने वाले व्यक्ति को हीरो माना. जिस आतंकी को कुछ लोग हीरो कहते हैं, उस विचारधारा के लोग आज भी अपने संगठन को रजिस्टर्ड नहीं करा पाए हैं. उनमें इतनी नैतिक हिम्मत भी नहीं है.”

‘देश में अलग-अलग धर्म और परंपराएं’

सपा सांसद ने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्मों, जातियों और जनजातियों के लोग रहते हैं. उनके मुताबिक हर प्रदेश और हर क्षेत्र की अपनी अलग परंपराएं हैं. उन्होंने कहा, “उन लोगों की विचारधारा यह है कि देश में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं, अलग-अलग जातियों और जनजातियों के लोग रहते हैं. हर प्रदेश और हर क्षेत्र की अपनी अलग परंपराएं हैं. धार्मिक परंपराएं अलग हैं, सामाजिक परंपराएं अलग हैं, शादी-ब्याह के तरीके अलग-अलग हैं. यह देश सदियों से नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से चला आ रहा है. भारतीय सभ्यता को किसी को यह बताने की जरूरत नहीं है कि वह कितनी पुरानी और समृद्ध है.”

भारत और अरब के पुराने रिश्तों का किया जिक्र

मोहिबुल्लाह  नदवी ने भारत और अरब के बीच पुराने संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, “इस्लाम के मक्का-मदीना से जुड़े इतिहास और पैगंबर मोहम्मद के आने से पहले भी अरब के लोगों के भारत से संबंध थे. भारत और अरब के बीच व्यापार होता था. उस दौर के समाज में भी भारत के लोगों, यहां की संस्कृति और यहां की सभ्यता की एक पहचान थी.”

नदवी ने आरएसएस को लेकर कहा, “दुर्भाग्य से, कुछ लोग जो 1925 में पैदा हुए और आज तक मैं उनका नाम नहीं ले रहा हूं, हालांकि उनका नाम भी ले सकता हूं, आरएसएस के लोग जो आज तक रजिस्ट्रेशन नहीं करा सके. जिन्होंने दशकों तक तिरंगा नहीं लहराया और जिनके पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई में कोई हिस्सा नहीं लिया, वे हिंदुत्व, हिंदू संस्कृति और हजारों साल पुरानी भारतीय सभ्यता के ठेकेदार बन गए.”

उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि हम हीरो हैं और हम मुसलमानों की नाक रगड़ सकते हैं, उन्हें कमजोर कर सकते हैं, उनकी मस्जिदों को गिरा सकते हैं, जजों को डरा सकते हैं और धमकाकर अपने मनमाफिक फैसले करवा सकते हैं.”

मस्जिदों के कागजात पर भी उठाए सवाल

मस्जिदों के दस्तावेजों को लेकर नदवी ने कहा, “मस्जिदों से कहा जा रहा है कि उनके पास कागजात हैं या नहीं. 200 साल पुरानी मस्जिदों के कौन से कागजात होंगे? उस समय रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था आज जैसी नहीं थी. लेकिन हम यह कर सकते हैं और पूरी दुनिया को उन्होंने यह दिखाया.”

उन्होंने मुसलमानों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “मैं देश के बहादुर मुसलमानों को बधाई देता हूं, जिन्होंने अब तक भी उनकी इन नादानी और नासमझी भरी हरकतों पर धैर्य बनाए रखा है. मुझे उम्मीद है कि वे आगे भी धैर्य का दामन थामे रखेंगे.”

नदवी ने कहा, “इसलिए, क्योंकि लड़ाई तो उससे लड़ी जाती है जो अपना नाम और पता बताकर सामने आए. जो कहे कि मैं फलां का बेटा हूं, मेरे पिता यह हैं, मेरे दादा यह हैं. लेकिन ऐसे लोगों से क्या लड़ाई हो सकती है, जो अपना नाम, अपने पिता और अपने दादा का पता तक नहीं बताते और इजरायल जाकर कहते हैं कि हमारा पिता वह है.”

UCC को लेकर कश्मीर का मुद्दा उठाया

समान नागरिक संहिता पर बोलते हुए सपा सांसद ने कहा, “यही वे लोग हैं जो समान नागरिक संहिता यानी UCC की बात करते हैं. इन्हीं लोगों ने कश्मीर के साथ अत्याचार किया. क्या कश्मीर 1947 से पहले भारत का हिस्सा नहीं था? वह भारत का हिस्सा था और आज भी है. दूसरे राज्यों को जो अधिकार मिलते हैं, वे अधिकार कश्मीर को भी मिलने चाहिए थे, लेकिन सिर्फ मुसलमान होने के कारण उनकी इज्जत और सम्मान को कुचला गया. यह सच्चाई है.”

उन्होंने आगे कहा, “इसी तरह बंगाल में भी लोगों को कुचला जा रहा है. देखिए, राष्ट्रों के बढ़ने और आगे बढ़ने का रास्ता इस तरह की चीजों से नहीं बनता.”

‘इंशाअल्लाह-माशाअल्लाह’ का भी किया जिक्र

नदवी ने जर्मनी और जर्मन भाषा का जिक्र करते हुए कहा, “अरब लोग, तुर्की के मुसलमान, दूसरे देशों के मुसलमान और हमारे भारतीय लोग भी जर्मनी में रहते हैं. मैं कुछ दिन पहले पढ़ रहा था कि जर्मन भाषा के साहित्य को तैयार करने वाले लोगों ने ‘इंशाअल्लाह’ और ‘माशाअल्लाह’ जैसे शब्दों को भी जर्मन भाषा में शामिल किया है. उनका मानना है कि इन शब्दों से सकारात्मक भावनाएं पैदा होती हैं, अगर ईश्वर ने चाहा तो होगा, मालिक सबका है और अगर मालिक चाहेगा तो सब होगा.”

इसके बाद उन्होंने जजों के ट्रांसफर और मस्जिदों के दस्तावेजों का मुद्दा उठाते हुए कहा, “छोटी-छोटी बातों पर अगर ‘इंशाअल्लाह’ और ‘माशाअल्लाह’ कहने पर किसी जज का ट्रांसफर हो रहा है, तो संभल में जो व्यक्ति नाच रहा था, उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? अगर मस्जिदों पर सवाल उठाया जा रहा है कि उनके पास कागजात हैं या नहीं, तो सड़कों पर बने और रोज बनाए जा रहे हजारों-लाखों मंदिरों के दस्तावेजों पर सवाल क्यों नहीं उठता?”

सपा सांसद ने कहा, “यही चीज देश की आने वाली पीढ़ी और देश के भविष्य को बर्बाद करेगी. देश की तरक्की सकारात्मक चीजों में है. देश की तरक्की आपस में लड़ने में बिल्कुल नहीं है. मुसलमानों से लड़ना, इस्लाम से लड़ना, ईसाइयों से लड़ना और सिख भाइयों से लड़ना, यह हमारी ऊर्जा को बर्बाद कर रहा है. ये सभी हमारे देश के लोग हैं.”

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा, “आजादी की लड़ाई लड़ने वालों ने यह नहीं देखा था कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान. उन्होंने यह नहीं देखा कि राम प्रसाद बिस्मिल कौन हैं और अशफाक उल्ला खान कौन हैं. उन्होंने यह नहीं देखा कि कौन किस धर्म से आता है. उन्होंने मिलकर आजादी की लड़ाई लड़ी.”

‘एक संस्कृति थोपकर देश मजबूत कैसे होगा?’

नदवी ने कहा, “मैं एक छात्र होने के नाते आपको बता सकता हूं कि जब अजान हो रही होती है, तो उसमें कहा जाता है कि अल्लाह ही सबका मालिक है और सबसे बड़ा है. इस्लाम का मूल विचार एक हो सकता है, लेकिन दुनिया में इतने सारे देश हैं और वे एक साथ नहीं रह सके. अरब के लोग भी एक साथ नहीं रह सके. तो आप किसी एक संस्कृति को थोपने की कोशिश करके देश को कैसे मजबूत बना सकते हैं? इससे मजबूती कैसे आएगी?”

उन्होंने आगे कहा, “ये लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं. इन्हें किसी को बुरा-भला कहने से ही सत्ता मिल रही है. एक-दो बार ऐसा करके उन्हें सफलता मिल गई, लेकिन अब वे मशीनों और ताकत के इस्तेमाल से ऐसा कर रहे हैं. अब तो हिंसा और दबाव के जरिए कर रहे हैं, मशीनों को जला रहे हैं, सबूत मिटा रहे हैं.”

नदवी ने कहा, “जनता बार-बार बेवकूफ नहीं बनेगी. जनता इस खेल को समझ चुकी है. पहले आप कहते थे कि देश को कैशलेस बनाएंगे, फिर उसी कैशलेस व्यवस्था में लोगों के पैसे काटे गए. आपने एक करोड़ रुपये देने का वादा किया, लेकिन कुछ नहीं किया. इसीलिए अब अखिलेश यादव जी एक बात कहा करते हैं कि सामाजिक न्याय के राज की स्थापना ही देश की भलाई और उसके भविष्य की मजबूती का आधार है.”

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