देवबंद में एक मंच पर गूंजी देशभर के पांच हजार मदरसों की आवाज, शिक्षा सुधार और नियमों के पालन पर मंथन
मस्जिद-ए-रशीद में कुल हिंद राब्ता मदारिस की आमसभा आयोजित, मौलाना अरशद मदनी बोले- एकता और धैर्य से करें चुनौतियों का मुकाबला
देवबंद। इस्लामी शिक्षा के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम देवबंद में मंगलवार को देशभर के मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, प्रशासनिक सुधार और आपसी एकता को लेकर व्यापक मंथन हुआ। ऐतिहासिक मस्जिद-ए-रशीद में आयोजित कुल हिंद राब्ता मदारिस-ए-इस्लामिया अरबिया की आमसभा में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रमुख उलमा और करीब पांच हजार मदरसों के जिम्मेदारों ने भाग लिया। इस दौरान मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ सरकारी नियमों के पालन और संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
मदरसों के दस्तावेज और अभिलेख दुरुस्त रखने की नसीहत
आमसभा की अध्यक्षता करते हुए दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि मदरसों की जिम्मेदारी केवल धार्मिक शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों की बेहतर परवरिश, नैतिक विकास और संस्थानों की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना भी बेहद जरूरी है।
उन्होंने मदरसा संचालकों को निर्देश दिए कि वे अपने संस्थानों से संबंधित सभी अभिलेख, रजिस्टर और आवश्यक दस्तावेज पूरी तरह दुरुस्त रखें। साथ ही सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से करें।

चुनौतियों से घबराने के बजाय एकजुट होकर आगे बढ़ें: अरशद मदनी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष एवं राब्ता मदारिस के सदर मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा दौर में मुसलमानों और उनके धार्मिक शिक्षण संस्थानों के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। ऐसे हालात में घबराने या निराश होने के बजाय आपसी इत्तेहाद, सब्र और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि राब्ता मदारिस की स्थापना का मूल उद्देश्य देशभर के मदरसों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना, उनके बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और शिक्षा व्यवस्था को समय की जरूरतों के अनुरूप मजबूत बनाना है। आपसी एकता और सामूहिक प्रयासों से ही चुनौतियों का प्रभावी मुकाबला किया जा सकता है।

विभिन्न राज्यों की रिपोर्टों पर हुआ मंथन
आमसभा के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से आई मदरसों की कार्यप्रणाली और शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित रिपोर्टों पर विस्तार से चर्चा की गई। विभिन्न उलमा ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षा के स्तर में सुधार और संस्थानों के बेहतर संचालन को लेकर सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक के अंत में मदरसों के बीच आपसी संपर्क और समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने पर सहमति बनी। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार लाने और भविष्य की चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए साझा प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया गया।
