‘सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच’, जयराम रमेश ने गंभीर आरोप लगाए

‘सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच’, जयराम रमेश ने गंभीर आरोप लगाए

नई दिल्ली/अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और नकदी में कथित चोरी का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस मामले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चुप्पी तोड़ने की मांग की है।

जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में ‘चंदा चोरी, आस्था धोखा’ लिखते हुए पूछा कि आखिर दान की चोरी के पीछे कौन लोग हैं और इसमें किन-किन लोगों की भागीदारी है? उन्होंने पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

2020 में ही ऑडिट फर्म ने दी थी चेतावनी

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के कुछ महीने बाद ही नवंबर 2020 में एक निजी ऑडिट फर्म ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर खामियां उजागर की थीं।

उनके मुताबिक, ऑडिट फर्म ने अपनी रिपोर्ट में प्रबंधन को गैर-पेशेवर बताते हुए कहा था कि कर्मचारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट नहीं हैं। दान का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने, लेन-देन की दोबारा जांच करने और डेटा सत्यापन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।

इसके अतिरिक्त हजारों कर्मचारियों के बावजूद एचआर विभाग का अभाव, बैंक खातों के मिलान और अकाउंटिंग के लिए योग्य कर्मचारियों की कमी तथा आईटी कंपनी के डेटा की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

छह साल बाद भी SOP लागू नहीं होने का आरोप

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ऑडिट फर्म की चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। फर्म ने प्रत्येक लेन-देन, डेटा प्रबंधन और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की सलाह दी थी। साथ ही आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं के रूप में मिलने वाले दान का अलग स्टॉक रजिस्टर रखने का सुझाव भी दिया गया था।

कांग्रेस नेता के अनुसार, छह साल बीतने के बावजूद इन व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2026 में गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच में भी सामने आया कि नकदी गिनने वाले कमरे से 105 बार पैसे निकाले गए। आरोप है कि इस दौरान कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के सामने खड़े होकर दृश्य को ढक देते थे।

इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के आरोपों का भी किया जिक्र

जयराम रमेश ने मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्मा ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की जानकारी दी थी।

वर्मा के हवाले से उन्होंने दावा किया कि निर्माण कार्यों के ठेकों में 40 प्रतिशत तक कमीशन लिया जा रहा था। इसके अलावा कागजों में फर्जी कर्मचारी दिखाने और निर्माण सामग्री के बिल बढ़ाकर तैयार करने जैसे आरोप भी लगाए गए थे।

कांग्रेस नेता ने कहा कि शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित इंजीनियर को ही हटा दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान कई ऐसी कीमती वस्तुएं मिलीं, जिनके दानदाताओं को रसीद तक जारी नहीं की गई थी।

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मांगा जवाब

जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि जब वर्ष 2020 में ही संभावित अनियमितताओं को लेकर चेतावनी दे दी गई थी, तो समय रहते सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए?

उन्होंने पूछा कि शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों हुई और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई कीमती वस्तुओं का व्यवस्थित हिसाब क्यों नहीं रखा गया?

कांग्रेस नेता ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करने के बजाय मामले को सीमित स्तर पर निपटाने का प्रयास किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग

जयराम रमेश ने सरकारी एसआईटी की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर इतने गंभीर मामले को समाप्त नहीं माना जा सकता।

उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का था या इसमें किसी बड़े स्तर पर संरक्षण और मिलीभगत की भूमिका भी रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि राम मंदिर में दान देने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़े इस मामले में पूरी सच्चाई देश के सामने आनी चाहिए।

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