‘कभी-कभी लगता है मैं तांत्रिक हूं…’, कांग्रेस नेता हरीश रावत ने खुद के लिए क्यों कही ये बात?
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का बयान चर्चा का विषय बन गया है. अपने एक विस्तृत लेखन में उन्होंने खुद को ‘तांत्रिक’ कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने राजनीतिक जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों को सामने रखा. उनके इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में नई बहस छिड़ गई है.
हरीश रावत ने कहा कि कभी-कभी उन्हें भी लगता है कि वे ‘तांत्रिक’ हैं, क्योंकि उन्होंने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संगठन को खड़ा किया. उन्होंने वर्ष 2000 में उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के समय का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पार्टी बेहद कमजोर स्थिति में थी और विधानसभा में मात्र दो सदस्य थे. इसके बावजूद कांग्रेस ने 2002 में सरकार बनाने में सफलता हासिल की, जिसका श्रेय उन्होंने पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को दिया.
2013 की आपदा को याद कर कही ये बात
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा को याद करते हुए कहा कि उस दौरान राज्य में भारी तबाही हुई थी, जिससे प्रशासनिक और संपर्क व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई थी. इस आपदा के बाद सरकार की कार्यशैली पर कई सवाल उठे. लेकिन, उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम किया.
रावत ने अपने केंद्रीय मंत्री कार्यकाल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जल संसाधन मंत्री रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय जल नीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आज भी प्रभावी है. साथ ही केन-बेतवा और कोसी-बूढ़ी गंडक जैसी नदी जोड़ परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम किया गया.
सोनिया गांधी के निर्देश पर उन्हें उत्तराखंड लौटकर केदारनाथ पुनर्निर्माण जैसे बड़े कार्य की जिम्मेदारी दी गई. इस चुनौती को उन्होंने भागीरथ प्रयास बताते हुए कहा कि सरकार ने सभी के सहयोग से इसे सफलतापूर्वक पूरा किया. हरीश रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान उत्तराखंडी मॉडल विकसित करने की भी बात कही. जिससे राज्य की अलग पहचान बनी.
अपने सियासी सफर पर रखा पक्ष
साल 2016 की राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को गिराने की कोशिश हुई. लेकिन, उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ लोकतंत्र की लड़ाई जीती. वहीं 2017 के चुनाव में भाजपा की प्रचंड लहर के बावजूद कांग्रेस ने अपने वोट प्रतिशत को बनाए रखा, जिसे उन्होंने कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम बताया. 2022 के चुनाव परिणामों पर उन्होंने टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि उसे समय के विवेचन पर छोड़ देना चाहिए.
जनता से सीधे सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि क्या उनकी सरकार ने आपदा के बाद पुनर्निर्माण में कोई कमी छोड़ी या जनता की भावनाओं को समझने में गलती की. अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल की सादगी का जिक्र करते हुए रावत ने बताया कि उन्होंने सरकारी खर्च कम करने के लिए कई फैसले लिए.
वर्तमान में विपक्ष की भूमिका निभा रहे हरीश रावत ने कहा कि वे लगातार सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहते हैं और जनता की आवाज को बुलंद कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोग उन्हें चाहे तांत्रिक कहें या कुछ और, लेकिन उनकी प्राथमिकता जनता का विश्वास और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण है.
