खुलासाः पंजाब की पराली से फूला दिल्ली-एनसीआर का दम 

 

पंजाब की पराली से दिल्ली- एनसीआर का दम फूल रहा है। पंजाब के पराली के धुएं से दिल्ली समेत उत्तर भारत के लोग बीमार हो रहे हैं। दिल्ली की कच्ची, टूटी सड़कें भी 20 से 30 फीसदी पीएम 2.5 वाली बारीक धूल आधारित कणों के लिए जिम्मेदार हैं। यह खुलासा आईआईटी दिल्ली के शोध में हुआ है।

आईआईटी दिल्ली का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च ऑन क्लीन एयर  प्रदूषण की रोकथाम पर शोध कर रहा है। आईआईटी दिल्ली के पर्यावरण व प्रदूषण विशेषज्ञ प्रो. अमित खरे के मुताबिक, पंजाब की पराली से दिल्ली एनसीआर में सबसे अधिक प्रदूषण होता है। शोध के मुताबिक, पंजाब में पराली जलाने से करीब 40-60 फीसदी और हरियाणा से 20-30 फीसदी प्रदूषण दिल्ली एनसीआर को प्रभावित करता है।

दूसरा दिल्ली में जगह-जगह वेस्ट मैनेजमेंट को जलाने और कच्ची व टूटी-फूटी, गंदी सड़कों से उड़ती धूल है। कच्ची व टूटी-फूटी सड़कों से उड़ती धूल से करीब 20 से 30 फीसदी प्रदूषण होता है। इसके अलावा मकानों के गिराने और निर्माण स्थलों से उड़ती धूल भी 20-30 फीसदी प्रदूषण फैलाती है।

दिल्ली एनसीआर के प्रदूषण पर सम-विषम से निगरानी
सेंटर कोआर्डिनेटर प्रो. हेमंज के मुताबिक, दिल्ली- एनसीआर के प्रदूषण पर ऑड-ईवन से निगरानी हो रही है। विशेषज्ञों की टीम प्रति घंटे प्रदूषण के स्तर को माप रही है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद आदि इलाकों में किस समय कितना पीएम 2.5 रहा और किस समय कितना घटा का अध्ययन हो रहा है।

इसके अलावा इंडोर प्रदूषण पर भी स्टडी हो रही है। इसमें मॉल, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल आदि से सैंपल लिया जाएगा। डिम्ट्स बसों में वायु प्रदूषण सेंसर लगाने पर विचार चल रहा है। इसके माध्यम से विभिन्न इलाकों के प्रदूषण का स्तर सामने आएगा।

 
 

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