शोभित विश्वविद्यालय गंगोह के स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट एंड लैंग्वेजेज विभाग द्वारा ” नारी शक्ति वंदन अधिनियम” विषय पर कार्यक्रम का आयोजन
गंगोह : शोभित विश्वविद्यालय गंगोह में दिनांक 15-04-2026 दिन बुधवार को स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट एंड लैंग्वेजेज विभाग द्वारा विश्वविद्यालय के सेमीनार हॉल में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमे विश्वविद्यालय के सभी विभागों के छात्र एवं छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिनमे नारी शक्ति विषय पर व्याख्यान एवं नारी शक्ति थीम पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रसारण भी शामिल रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट एंड लैंग्वेजेज विभाग की डीन एंड हेड प्रो.(डॉ.) गुंजन अग्रवाल ने विषय नारी शक्ति पर चर्चा करते हुए सभी छात्र एवं छात्राओं को इसके महत्व व कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए सभी को अवगत कराया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम साल 2023 में ही पास हो चुका है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। इस कानून के अंतर्गत महिलाओं को लोकसभा, राज्यसभा और दिल्ली विधानसभा में कम से कम 33% आरक्षण देने की बात कही गई है। ताकि राजनीति में भी महिलाएं पुरुषों के बराबर आ सके। कार्यक्रम में मंच सञ्चालन छात्रा मनस्वी सैनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सभी शिक्षकों एवं छात्र छात्राओं द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत “समानता का संकल्प” हेतु शपथ ली गई।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अनेक छात्र एवं छात्राओं ने विषय पर अपने विचार रखे जिनमे, अन्नू सैनी, मुकर्रम, सावन, मनस्वी, पारुल, गरिमा, वेदांशी, प्रज्ञा, अंजलि, रोज़ी आदि छात्र एवं छात्राएँ शामिल रही।

इस अवसर पर शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह के कुलपति प्रो.(डॉ.) रणजीत सिंह ने कार्यक्रम के आयोजकों अनेक शुभकामनाएं दी और सभी छात्र एवं छात्राओं को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रति प्रेरित करते हुए कहा कि यह अधिनियम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज में महिलाओं के अधिकार, सम्मान और भागीदारी को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाएं, जिससे एक समतामूलक एवं सशक्त समाज का निर्माण संभव हो सके।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रो.(डॉ.) महिपाल सिंह ने कार्यक्रम के आयोजकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम सभी को समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए, जिससे एक समावेशी और प्रगतिशील समाज की स्थापना हो सके।
इस अवसर पर डॉ. करुणा अग्रवाल, डॉ. जूही अग्रवाल व विकास कुमार, आदि शिक्षकगण उपस्थित रहे।
