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ऑफ द रिकॉर्डः आपराधिक डाटा ने नीतीश के सुशासन के दावों की हवा निकाली

 

नेशनल डेस्कः  बिहार में सुशासन बाबू अच्छे शासन का दावा करते हैं, लेकिन राज्य का आपराधिक डाटा इसके विपरीत होने से उनके दावों की हवा निकल गई है। अगर जदयू-राजद और जदयू-भाजपा के कार्यकाल के डाटा को देखें तो जदयू-भाजपा कार्यकाल में राज्य में अपराध में तेजी से बढ़ौतरी दर्ज की गई।

बिहार सरकार के राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एस.सी.आर.बी.) के अनुसार, नीतीश-लालू के शासन में 339599 के मुकाबले नीतीश-सुशील मोदी शासन में 4,12,889 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। नवम्बर 2015 में राजद गठबंधन के रूप में मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद से 27 जुलाई 2017 को नीतीश कुमार ने इस्तीफा देने के बाद भाजपा से हाथ मिला लिया था। बिहार में 2015 दिसम्बर से जुलाई 2017 तक 4,412 हत्याएं हुईं। वहीं जब ग्रैंड अलायंस एन.डी.ए. की अवधि के दौरान अगस्त 2017 से मार्च 2019 तक 4,623 हत्याएं हुईं।

आंकड़ों के अनुसार, राज्य में राजद कार्यकाल दौरान 1,774 बलात्कार की घटनाओं के मुकाबले एन.डी.ए. के कार्यकाल के दौरान 2,324 दर्ज की गई हैं। इसी तरह, मार्च 2019 तक फिरौती के लिए अपहरण की 68 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि राजद के साथ वाली मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में 37 घटनाएं दर्ज की गईं।

इसी प्रकार बिहार में अगस्त 2017 से 31 मार्च 2019 तक 2,928 डकैती की घटनाएं दर्ज कीं, जबकि दिसम्बर 2015 और जुलाई 2017 के बीच ये 2,444 थीं। राजद की बजाय एन.डी.ए. 3.0 के शासन में चोरी की घटनाएं 39,109 बढ़कर 51,807 हो गईं। इसी तरह अपहरण के मामले भी बढ़ गए, जो कि 13,269 से 16,457 तक पहुंच चुके हैं। बेशक, बैंक डकैती एन.डी.ए. शासन में पिछले राजद शासन के मुकाबले 14 से 10 तक कम हुईं, लेकिन इस शासन में सड़क डकैती के मामले 1,929 से बढ़कर 2,480 हो गए। नीतीश के लिए एक सांत्वना है कि पहले राजद गठबंधन सरकार दौरान राज्य में 19,537 दंगों के मुकाबले एन.डी.ए. 3.0 कार्यकाल में 16,785 तक गिरावट देखी गई।

 
 

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