NCRB रिपोर्ट में योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर, महिलाओं की सुरक्षा में यूपी अव्वल
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वर्ष 2024 की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर कई अहम आंकड़े सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में दर्ज अपराधों की तुलना में यूपी का क्राइम रेट राष्ट्रीय औसत से काफी कम है. यही वजह है कि देश की सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश अपराध दर के मामले में काफी नीचे है.
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में कुल 35,44,608 आपराधिक मामले दर्ज किए गए. राष्ट्रीय अपराध दर 252.3 रही, जबकि उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 दर्ज किया गया. प्रदेश देश में कुल अपराधों के मामले में 18वें स्थान पर है, जबकि देश की करीब 17 प्रतिशत आबादी यूपी में रहती है.
हत्या, डकैती और फिरौती के मामलों में बेहतर स्थिति
रिपोर्ट में कहा गया है कि हत्या जैसे गंभीर अपराधों में उत्तर प्रदेश की स्थिति कई बड़े राज्यों से बेहतर है. हत्या के मामलों में यूपी देश में 29वें स्थान पर है, जबकि हत्या के प्रयास के मामलों में 26वें स्थान पर है.
सबसे बड़ी बात यह है कि फिरौती के लिए अपहरण और डकैती जैसे अपराधों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे निचले पायदान यानी 36वें स्थान पर है. इसे कानून-व्यवस्था के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
लूट के मामलों में यूपी 28वें स्थान पर है, जबकि बलवा के मामलों में प्रदेश 19वें नंबर पर है. पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में यूपी 23वें स्थान पर रहा.
महिलाओं के खिलाफ अपराधियों पर सख्त कार्रवाई
महिलाओं से जुड़े अपराधों को लेकर भी रिपोर्ट में कई अहम बातें सामने आई हैं. महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश 17वें स्थान पर है. वहीं दुष्कर्म के मामलों में प्रदेश देश में 24वें नंबर पर है. सरकार का दावा है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तेजी से जांच पूरी होने की वजह से महिलाओं को न्याय दिलाने में यूपी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है.
एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को सजा दिलाने में उत्तर प्रदेश पूरे देश में नंबर-1 पर है. प्रदेश की दोषसिद्धि दर 76.6 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो देश में सबसे ज्यादा है.
इसके मुकाबले पश्चिम बंगाल में यह दर सिर्फ 1.6 प्रतिशत है. कर्नाटक में 4.8 प्रतिशत, तेलंगाना में 14.8 प्रतिशत, केरल में 17 प्रतिशत, पंजाब में 19 प्रतिशत और तमिलनाडु में 23.4 प्रतिशत मामलों में ही दोषियों को सजा मिल पाती है.
रिपोर्ट के अनुसार यूपी में महिला अपराध करने वालों के बच निकलने की संभावना काफी कम है. सरकार इसे जीरो टॉलरेंस नीति का असर बता रही है.
महिला सुरक्षा के मामलों में भी बेहतर प्रदर्शन
मर्यादा भंग के मामलों की दर भी यूपी में दूसरे कई राज्यों से कम बताई गई है. उत्तर प्रदेश में यह दर 18.6 है, जबकि तेलंगाना में 52.8, पश्चिम बंगाल में 39.5 और केरल में 23.9 दर्ज की गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के बड़े शहर महिलाओं से जुड़े मामलों की जांच तेजी से पूरी कर रहे हैं. कानपुर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में चार्जशीट दाखिल करने की दर 84.4 प्रतिशत है, जबकि लखनऊ में यह 83.7 प्रतिशत दर्ज की गई.
हत्या के मामलों की दर कई राज्यों से कम
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार यूपी में हत्या के मामलों की दर प्रति एक लाख आबादी पर 1.3 है. यह तेलंगाना के 2.7, पंजाब के 2.5 और झारखंड के 3.7 से काफी कम है. सरकार का कहना है कि लगातार पुलिस कार्रवाई, माफियाओं पर सख्ती और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की वजह से गंभीर अपराधों पर नियंत्रण संभव हुआ है.
रिपोर्ट में जेलों की स्थिति को लेकर भी उत्तर प्रदेश को बेहतर बताया गया है. महिला जेलों में अधिभोग दर सिर्फ 36.7 प्रतिशत है, जिससे महिला कैदियों को व्यवस्थित माहौल मिल रहा है.
वहीं यूपी की केंद्रीय जेलों में अधिभोग दर 74.3 प्रतिशत दर्ज की गई है. यह पंजाब की 118.4 प्रतिशत और केरल की 149.9 प्रतिशत अधिभोग दर से काफी बेहतर मानी जा रही है.
सरकार ने बताया जीरो टॉलरेंस नीति का असर
राज्य सरकार का कहना है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की वजह से प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है. एनसीआरबी की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश न सिर्फ अपराध नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, बल्कि महिलाओं को न्याय दिलाने में भी देशभर में उदाहरण बनकर उभरा है.
सरकार का दावा है कि आने वाले समय में भी अपराधियों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि प्रदेश में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके.
