हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व करबला के शहीदों की याद में निकाला मातमी जुलूस

हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व करबला के शहीदों की याद में निकाला मातमी जुलूस
सहारनपुर में 10 मोहर्रम का मातमी जुलूस निकालते शिया सोगवार।

सहारनपुर। 10 मोहर्रम  यौमे आशुरा को हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व करबला के शहीदों की याद में मातमी जुलूस निकाला गया जिसमें या हुसैन या हुसैन या अब्बास या अब्बास की सदाएं बुलन्द की गई। अकीदतमंदों ने जंजीर में बंधी छुरियों, कमाह व हाथों से मातम किया। सोगवारों के जिस्म से खून रिस रहा था। जंजीर व कमाह का मातम बड़ी इमाम बारगाह से होता हुआ जामा मस्जिद तक हुआ।

जामा मस्जिद कला (चैक फव्वारा) पर हुज्जत-उल इस्लाम आली जनाब मौलाना सैय्यद तहकीक हुसैन रिजवी साहब ने तकरीर करते हुए हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की कुर्बानी का पसे मंजर पेश किया। उसके बाद जुलूस आगे बढ़ गया। दोबारा जंजीरों का मातम करबला पहुचने के बाद भी हुआ। बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज से शुरू हुए जुलूस में सबसे आगे ऊंट, घोड़े, झोटा बुग्गी पर बैठे छोटे-छोटे बच्चे काले कपडे़ पहने हाथों में काले निशान लिए हुए हाय सकीना, हाय प्यास, चमन- चमन, कली-कली, अली-अली नाराए हैदरी या अली, हुसैनियत जिन्दाबाद यजिदयत मुर्दाबाद, नाराए तकबीर अल्लाहो अकबर की सदाऐं बुलन्द करते  चल रहे थे। उनके पीछे शबीह अलम हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम को लेकर सै0 तालिब जैदी चल रहे थे। शबीह अलम के पीछे अन्जुमने इमामिया व अन्जुमने अकबरिया व सागवारे अन्जुमन ए अकबरिया चल रही थी। अन्जुमने इमामिया में नोहा पढ़ने वालों में सलीस हैदर काजमी, मिर्जा मेहरबान पंजेतन, मिर्जा माहिर पजेतन, आसिफ रजा, तौसिक मैहदी, अली मैहदी, शहबाज काजमी, शौजब रजा आदि मौजूद रहे।  अन्जुमन इमाममिया का संचालन मिर्जा मेहरबान, लियाकत हुसैन अनवार जैदी, जमाल जैदी, मुसययब रजा, कौसर अब्बास, फिरोज हैदर, आदि ने किया। सोगवारे अन्जुमने अकबरिया में नौहा पढ़ने वालों में अनवर अब्बास जैदी, अदनान काजमी, शुजा काजमी, रहबर जैदी, नईम मिर्जा, शबीह हैदर आदि शामिल रहे।

सोगवारे अन्जुमन अकबरिया का संचालन में अख्तर अली जैदी, इफतेखार हुसैन जैदी, विजारत काजमी, ख्वाजा नगीन, कब्बू, महमूद नकवी, वाजिद अली, शाह अफरोज, मौ0 आलम, आगाज अतहर, शाने रजा आदि ने किया। अन्जुमने अकबरिया मे नौहा पढने वालो में गुडडू, रियाज आब्दी, मिर्जा नदीम, समीर आब्दी, मिर्जा अयाज, दानिश जाफरी मौजूद रहे। अअन्जुमने अकबरिया का संचालन शबीह अब्दी, शादाब आब्दी, निशान हैदर आब्दी, दानिश आब्दी रविश आब्दी, मानू आब्दी, मौहम्मद आब्दी, अजमत आब्दी, रिहान आब्दी, मुनव्वर आब्दी, आदि ने किया। जुलूस में सबसे पीछे फुलो से सजा जुलजना (शबीह दुलदुल) चल रहा था जिसकी बाघ (लगाम) तनवीर हैदर व अकबर अब्बास आदि ने पकड रखी थी तथा जुलूस के बीच मे ताजिया (शबीह रोजा ए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम) चल रहा था।

जुलूस बड़ी इमाम बारगाह से शुरू होकर पुल सब्जी मण्डी, जामा मस्जिद कलां, मोर गंज, भगत सिह चैक, खुमरान रोड, पुरानी चुंगी, महाराज सिह कालेज के सामने से होता हुआ पुराना घांस कांटा स्थित करबला पहुच कर सम्पन्न हुआ सोगवारो ने करबला पहुच कर फाका खोला। जुलूस का संचालन करबला के प्रबन्धक सै0 तालिब जैदी ने किया। जुलूस में उ0प्र0 शिया सैन्ट्रल वक्फ बोर्ड के स्थाई अधिवक्ता मन्जर हुसैन काजमी, प्रबन्धक बड़ा इमामबाड़ा जाफर नवाज डाक्टर अथर अब्बास, प्रबन्धक छोटा इमामबाड़ा अन्सारियान दानिश आब्दी, प्रबन्धक इमामबाड़ा सामानियान जिया अब्बास, इशरत हुसैन, जमीर काजमी, सिबतैन रजा, कौसर अब्बास, काजी अकरम, प्यारे मियां, सकलैन रजा, सलीस हैदर काजमी, फरहत हुसैन, साजिद काजमी, जैगम अब्बास, रियाज हैदर जैदी, पत्रकार जिया अब्बास जैदी, मिर्जा अहसान,  अजहर काजमी, रियासत हवारी, फिरोज हैदर, कैसर अब्बास, नदीम जैदी, नजमी काजमी, आलम काजमी, सलमान, इमरान, फराज जैदी, अली जैकब काजमी, बाकर काजमी, मीसम काजमी, सहीम काजमी, तहसीन काजमी, अबुतालिब, दानिश जैदी, काशिफ जैदी, किश्वर हुसैन, मुन्तजिर मैहदी आदि चल रहे थे।

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