मौलाना साजिद रशीदी का बयान: ‘कम से कम 10 बच्चे पैदा करो, हमारी बराबरी पर तो आओ’
नई दिल्ली। इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी का बच्चों की संख्या को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है। एक बयान के जवाब में उन्होंने हिंदुओं से कम से कम 10 बच्चे पैदा करने की बात कही। उनका कहना था, “कम से कम 10 बच्चे पैदा करो, कम से कम हमारी बराबरी पर तो आओ।”
मौलाना साजिद रशीदी आरएसएस और कुछ अन्य संगठनों की ओर से हिंदुओं से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि मुस्लिम परिवारों में पांच या उससे अधिक बच्चे होना आम बात है और कुछ परिवारों में बच्चों की संख्या 10, 11 या 12 तक भी होती है।
बच्चे पैदा करने को लेकर बताया अपना तर्क
मौलाना रशीदी ने हिंदू और मुस्लिम समुदायों में बच्चों की संख्या को लेकर अपने विचार रखते हुए कहा कि इस्लाम में यह विश्वास है कि बच्चों को ऊपर वाला खिलाता है और माता-पिता केवल माध्यम होते हैं। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत उनका दावा है कि हिंदू परिवारों में बच्चों की परवरिश और खर्च को लेकर अलग सोच होती है, जिसकी वजह से परिवार कम बच्चे पैदा करते हैं।
उन्होंने आगे दावा किया कि मुस्लिम परिवारों में बच्चों की शिक्षा और देखभाल पर ध्यान दिया जाता है। साथ ही उन्होंने वृद्धाश्रम का जिक्र करते हुए हिंदू परिवारों को लेकर टिप्पणी की।
‘औरत को बच्चा पैदा करने की मशीन समझ रहे हो’
महिलाओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए कहने पर सवाल उठाए जाने के जवाब में मौलाना रशीदी ने कहा कि यदि पांच बच्चे पैदा करने की बात हो रही है तो 10 बच्चे क्यों नहीं, “हमारे बराबर तो आओ।” उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम में बच्चे पैदा करने पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
मौलाना साजिद रशीदी पहले भी अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनका यह ताजा बयान भी सोशल मीडिया पर वायरल है और इसको लेकर बच्चों की संख्या, परिवार नियोजन और धार्मिक मान्यताओं को लेकर बहस छिड़ गई है।
