पीएफ घोटाले में ऊर्जा मंत्री ने यूपीपीसीएल चेयरमैन की भूमिका पर उठाए सवाल, सीएम योगी को लिखा पत्र

 

बिजलीकर्मियों के पीएफ की राशि डीएचएफएल में निवेश किए जाने के मामले में पावर कॉर्पोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह सवाल किसी और ने नहीं बल्कि ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने खड़े किए हैं। शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे मामले में कॉर्पोरेशन के शीर्ष प्रबंधन यानी चेयरमैन की भूमिका को संदेहास्पद माना है और जांच कराने का अनुरोध किया है।

इस घोटाले का खुलासा होने के बाद से ऊर्जा मंत्री भी विपक्षी दलों के निशाने पर हैं। वह पूरे मामले में विभागीय अफसरों की भूमिका को लेकर नाराज हैं। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि उ.प्र. पावर सेक्टर इम्पलाइज ट्रस्ट ने कर्मचारियों के जीपीएफ व सीपीएफ की भारी-भरकम राशि नियम विरुद्ध डीएचएफएल में निवेश की।

इस प्रकरण में कॉर्पोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की ओर से उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। यही नहीं, जब 10 अक्तूबर, 2019 को मिले एक गुमनाम शिकायती पत्र के आधार पर शीर्ष प्रबंधन ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की तो उस विषय में भी उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। जबकि हजारों कार्मिकों के हितों से जुड़े इस विषय के बारे में उन्हें अवगत कराना शीर्ष प्रबंधन का दायित्व था।

ऊर्जा मंत्री ने उठाए ये सवाल
श्रीकांत ने पत्र में लिखा है कि इस दायित्व से विमुखता के क्या कारण थे? किन कारणों से ट्रस्ट की हर तिमाही होने वाली बैठकों को लगातार टाला गया? गिरफ्तार लोगों में से एक तत्कालीन निदेशक (वित्त) द्वारा 29 जून, 2019 को सेवानिवृत्ति के बाद भी निवेश संबंधी अनियमितता से शीर्ष प्रबंधन कैसे अनभिज्ञ रहा? मामले की उच्चस्तरीय जांच के क्रम में इन सवालों का उत्तर मिलना आवश्यक है।

 
 

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