LAC तनावः चीन से निपटने के लिए लद्दाख पहुंचा ‘भीष्म’, जानिए क्या है इसकी खासियत

 

नई दिल्लीः पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच बढ़ते गतिरोध को देखते हुए भारतीय सेना ने कमर कस ली है। चीन को जवाब देने के लिए भारत ने अपने सबसे घातक और सबसे भरोसेमंद हथियार टी-90 भीष्म टैंक को लद्दाख में उतार दिया है। लद्दाख के खुले मैदानों में इन टी-90 टैंकों से बेहतर कोई हथियार नहीं है। पूर्वी लद्दाख में स्पांगुर गैप से होकर ये टैंक, सीधे चीन के नियंत्रण वाली सीमा में जा सकते हैं। इसके अलावा लद्दाख के डेमचौक इलाके में रणनीतिक तौर पर पांच महत्वपूर्ण पासों की सुरक्षा का जिम्मा भी ये टैंक आसानी से संभाल सकते हैं। इन दोनों ही इलाकों में खुले मैदान हैं, यहां पर जमीन रेतीली है, इसलिए यहां पर टैंकों के जरिए तेजी से बढ़ना आसान है। स्पांगुर गैप और डेमचौक दोनों ही जगहों से चीन का एक महत्वपूर्ण हाईवे G-219, करीब 50 किलोमीटर ही दूर है। इसलिए अगर युद्ध हुआ तो चीन के लिए इन टैंकों का सामना करना आसान नहीं होगा।
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भीष्म टैंक की क्या हैं खूबियां

  • T-90 भीष्म टैंक रशियन टेक्नोलॉजी से बना मेड इन इंडिया टैंक है
  • इसमें लेजर गाइडेड INVAR मिसाइल सिस्टम लगा है
  • चार किलोमीटर तक दुश्मन का कोई भी टैंक बच नहीं सकता
  • इसके हंटर किलर कॉन्सेप्ट से गनर और कमांडर दोनों ही निशाना लगा सकते हैं
  • टैंक में 125mm की गन लगी है और ये 60 सेकेंड में 8 गोले फायर कर सकता है

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  • दुनिया के सबसे हल्के टैंक में से एक है
  • 1000 हॉर्स पावर का इंजन है, और ये 72 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है
  • Self-Entrenching Plate यानी सामने लगे उपकरण के सहारे ये टैंक खुद को छिपाने के लिए खुद खाईं भी खोद सकता है
  • टैंक दिन हो या रात, हर समय पर युद्ध लड़ने की क्षमता है
  • इसमें दुश्मन की किसी भी मिसाइल को रोकने का कवच है
  • भीष्म 5 मीटर गहरी नदी या नाले को भी आसानी से पार कर सकता है

भारत के पास कितने टैंक हैं
भारतीय सेना के पास करीब 4300 टैंक हैं। 2016 में भारत ने लद्दाख में टैंकों की पहली बिग्रेड तैनात की थी। इसमें T-72 टैंक थे, लेकिन जब चीन की तरफ से LAC पर T-95 टैंकों की तैनाती की खबरें आईं, तो भारतीय सेना ने टी-90 भीष्म टैंकों को लद्दाख में उतार दिया।
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एलएसी पर इन्फ्रास्ट्रक्चर से परेशान है चीन
बुधवार को चीन ने पहली बार ये बात स्वीकार कर ली, कि उसे भारत द्वारा गलवान घाटी में LAC के करीब सड़कें और पुल बनाने से ही परेशानी है। ये बयान चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की तरफ से आया है। खुद चीन अब ये मान रहा है कि ये 1962 का भारत नहीं है और ये भारत चीन को उसी की भाषा में जवाब देना जानता है। अगर पहले की सरकारों की तरह आज का भारत सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर ना बनाता तो चीन कुछ नहीं बोलता। चीन को असली परेशानी यही है कि आज भारत की सरकार सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने को लेकर बहुत सक्रिय है और इसी से चीन को डर लगता है।
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सेना प्रमुख नरवणे ने किया लद्दाख दौरा
सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने लद्दाख का दौरा किया था। मंगलवार को वो लेह में गलवान घाटी के घायल सैनिकों से मिले थे। उन्होंने अपने कोर कमांडर्स से बातचीत की थी और ग्राउंड जीरो के बारे में जानकारी ली थी, बुधवार को वो पूर्वी लद्दाख में स्थित कई फॉरवर्ड पोस्ट पर गए और सैनिकों का मनोबल बढ़ाया था। उन्होंने उन सैनिकों को सम्मानित किया, जिन्होंने गलवान घाटी में चीन की सेना का डटकर मुकाबला किया था।
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