खुत्बा विवाद: महबूबा मुफ्ती का BJP पर हमला, ‘यह धार्मिक मामलों में दखल’
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड के शुक्रवार के उपदेश (ख़ुत्बे) के लिए एक जैसा नियम लागू करने के प्रस्ताव की कड़ी निंदा की है. उन्होंने केंद्र सरकार पर मुसलमानों के मामलों में दखल देने के लिए जम्मू-कश्मीर को एक ‘प्रयोगशाला’ की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और इसे अस्वीकार्य बताया.
पार्टी दफ्तर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “जम्मू-कश्मीर एक प्रयोगशाला बन गया है. वे पहले यहां प्रयोग करते हैं और फिर उसे पूरे भारत में लागू करते हैं.” उन्होंने आदेशों की निंदा करते हुए कहा कि जो गैर-मुस्लिम हमारी मस्जिदों पर हमले करते हैं, वे हमें यह नहीं बता सकते कि उपदेश में क्या हो और कैसे कहा जाए.
महबूबा मुफ्ती का केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री पर हमला
वक्फ बोर्ड और केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री पर तीखा हमला करते हुए महबूबा मुफ़्ती ने कहा, ”शादी-ब्याह के मामलों में ‘यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड’ की तरह, अब BJP जम्मू-कश्मीर की मस्जिदों में शुक्रवार के उपदेशों के लिए भी एक जैसा नियम लाने की कोशिश कर रही है.”
‘यह धार्मिक मामलों में दखल है और यही BJP का एजेंडा’
PDP प्रमुख ने आगे कहा, “यह धार्मिक मामलों में दखल है और दुर्भाग्य से यही BJP का एजेंडा है, मुसलमानों पर नियंत्रण रखना और उनके धर्म में दखल देना. जिस तरह वे यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड लाना चाहते हैं, उसी तरह अब वे धार्मिक मामलों में भी एकरूपता थोपना चाहते हैं.”
‘इमामों और धार्मिक विद्वानों को उपदेश की सामग्री तय करना चाहिए’
राज्य के नियम को खारिज करते हुए महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि ‘ख़ुत्बे’ (उपदेश) की सामग्री क्या होगी, यह सरकार को नहीं बल्कि इमामों और धार्मिक विद्वानों को तय करना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक रीति-रिवाजों में राज्य का लगातार दखल पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा”.
‘क्या गैर-मुस्लिम मंत्री तय करेंगे कि मस्जिदों में क्या कहा जाए’
उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर मुस्लिम-बहुल इलाका है. शुक्रवार की नमाज़ के दौरान क्या उपदेश दिया जाएगा, यह कौन तय करेगा? क्या गैर-मुस्लिम मंत्री तय करेंगे कि हमारी मस्जिदों में क्या कहा जाना चाहिए? इन मस्जिदों के जरिए इस्लाम का प्रचार-प्रसार किया गया है और ये स्थानीय समुदायों से गहराई से जुड़ी हुई हैं. हर इलाके की अपनी चिंताएं और मुद्दे होते हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है.”
‘धार्मिक स्थलों की ओनरशिप मुसलमानों को सौंपी जानी चाहिए’
महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि धार्मिक स्थलों की ओनरशिप सिर्फ मुसलमानों को सौंपी जानी चाहिए. उन्होंने कहा, ”मस्जिदें उन मुस्लिम समुदायों की हैं जिन्होंने पर्सनल डोनेशन और ज़कात (दान) के जरिए उन्हें बनाया और उनकी देखभाल की है. ये सरकार की मस्जिदें या उनकी प्रॉपर्टी नहीं हैं”.
मीरवाइज को खुतबे का कंटेंट तय करने दें- महबूबा मुफ्ती
महबूबा मुफ्ती ने कहा, “वक्फ़ बोर्ड को J&K सरकार के कंट्रोल में लाया जाना चाहिए और मीरवाइज उमर फारूक को शामिल करने वाले एक फोरम को काम करने की इजाजत दी जानी चाहिए. उलेमा और मीरवाइज को शुक्रवार के खुतबे (धर्मोपदेश) का कंटेंट तय करने दें. हम ऐसे आदेश कैसे मान सकते हैं?”
महबूबा मुफ़्ती ने अपने विरोध को सेंट्रल वक्फ अमेंडमेंट बिल के खिलाफ चल रही बड़ी राजनीतिक लड़ाई से जोड़ते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा धार्मिक संस्थाओं के मामलों में एडमिनिस्ट्रेटिव दखल का विरोध किया है.
