लद्दाख में LAC से कैसे पीछे हटेंगे भारत और चीन के सैनिक, खाका तैयार

 

 

  • पूर्वी लद्दाख में सैनिकों को किस तरह पीछे करना है, इसका एक खाका तैयार किया गया है
  • एलएसी पर तैनात दो रेजिमेंट से कहा गया है कि वे निर्देश मिलते ही पीछे हटने की तैयारी कर लें
  • सूत्रों के मुताबिक दोनों किस तरह सैनिकों को पीछे करेंगे इस पर भारत-चीन के बीच बातचीत होगी
  • सेना मानकर चल रही है कि गतिरोध खत्म होने में वक्त लगेगा, खासकर डेपसांग और पैंगोंग एरिया में

नई दिल्ली
भारत और चीन में चल रहे तनाव के बीच पूर्वी लद्दाख में सैनिकों को किस तरह पीछे करना है, इसका खाका तैयार किया गया है। यह दोनों तरफ से होगा। सूत्रों के मुताबिक लद्दाख में एलएसी पर तैनात दो रेजिमेंट से कहा गया है कि वे निर्देश मिलते ही पीछे हटने की तैयारी कर लें। इनमें से एक लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंट है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देश किस तरह सैनिकों को पीछे करेंगे इस पर भारत-चीन के बीच अलग अलग पॉइंट्स पर लोकल कमांडर स्तर पर बातचीत होगी।

आर्मी चीफ के लद्दाख दौरे के दौरान सेना के कमांडर्स से भी इस पर चर्चा की गई। सेना मानकर चल रही है कि गतिरोध खत्म होने में वक्त लगेगा, खासकर डेपसांग और पैंगोंग एरिया में। पैंगोंग एरिया में फिंगर-4 से फिंगर-8 के बीच चीन ने कई परमानेंट स्ट्रक्चर बना लिए हैं। यहां सैनिकों को पीछे करना आसान नहीं है। सूत्रों के मुताबिक पैंगोंग एरिया में चीनी और भारतीय सैनिक एकदम आमने सामने हैं और फिर किसी तरह की कोई झड़प ना हो जाए इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। भारतीय सैनिकों से कहा गया है कि अपनी तरफ से पहल ना करें लेकिन चीन की तरफ से गलत हरकत होती है तो कड़ा जवाब दें।

आर्मी चीफ ने रक्षा मंत्री को बताया बॉर्डर का हाल
लेह-लद्दाख दौरे से लौटकर आर्मी चीफ जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को हालात की जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक लद्दाख में जनरल नरवणे ने आर्मी कमांडर्स के साथ मिलकर एलएसी पर भारत की पॉजिशन का आकलन किया। इस पर भी चर्चा हुई कि चीन किन इलाकों में आगे बढ़ने और एलएसी पर स्थिति बदलने की कोशिश कर सकता है। ऐसे सभी इलाकों में पट्रोलिंग बढ़ाने के लिए कहा गया।

पॉम्पियो के बयान से बढ़ी हलचल

अमेरिका के भारत के पक्ष में अपनी सेना चीन के सामने तैनात करने की धमकी के बाद कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा था कि वह चीन की विस्तारवादी नीति को रोकने के लिए दक्षिण एशिया की ओर से अपनी सेना बढ़ाएगा। भारत ने मामले की संवदेनशीलता को देखते हुए अमेरिका के इस फैसले पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी। उधर अमेरिका के इस कदम से यूरोप में नाराजगी है। उनका तर्क है कि इससे रूस को इलाके में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया है कि बदली परिस्थिति में रूस नहीं बल्कि चीन उसका मुख्य प्रतिद्वंद्वी है।

 
 

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