क्या ‘कुत्ता-बिल्ली’ वाले बयान ने बिगाड़ा बीजेपी का खेल? बांकीपुर हार के बाद वायरल दावे पर छिड़ी बहस
लखनऊ: बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस सीट पर जीत दर्ज कर भारतीय जनता पार्टी के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को चुनौती दी है। चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी की हार के कारणों को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं हो रही हैं, जिनमें कथित ‘कुत्ता-बिल्ली’ बयान भी प्रमुख मुद्दा बन गया है।
चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने कई सभाओं में दावा किया था कि बीजेपी के कुछ नेता यह कहते हैं कि बांकीपुर से “कुत्ता-बिल्ली को भी उम्मीदवार बना दिया जाए तो वह जीत जाएगा।” इस बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर व्यापक चर्चा हुई। कई लोगों ने दावा किया कि यह टिप्पणी बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद से जुड़ी हुई है।
उपचुनाव के दौरान एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर ऐसा बयान सुनाई देता है। विपक्षी दलों और जनसुराज समर्थकों ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया, जबकि बीजेपी समर्थकों ने इसकी सत्यता पर सवाल उठाए।
रविशंकर प्रसाद ने किया खंडन
विवाद बढ़ने पर रविशंकर प्रसाद ने ऐसे किसी बयान से साफ इनकार किया। उनका कहना है कि वायरल वीडियो भ्रामक और तथ्यों से परे है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान करती है और इस तरह की भाषा पार्टी की कार्यशैली या विचारधारा का हिस्सा नहीं हो सकती।
क्या पड़ा चुनावी असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के दौरान वायरल हुए इस दावे को प्रशांत किशोर ने अपने प्रचार अभियान में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया। कई सभाओं में इसका उल्लेख किए जाने से यह मुद्दा मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि यह कहना मुश्किल है कि केवल इसी वजह से बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस विवाद ने चुनावी माहौल को प्रभावित जरूर किया।
सच्चाई अब भी स्पष्ट नहीं
फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि कथित ‘कुत्ता-बिल्ली’ टिप्पणी वास्तव में किसने की थी या फिर यह बयान संदर्भ से काटकर अथवा संपादित रूप में पेश किया गया। वायरल वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। वहीं, प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक रूप से किसी विशेष नेता का नाम लेकर इस बयान की पुष्टि नहीं की है।
बांकीपुर उपचुनाव के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है और बीजेपी भी वायरल दावों की वास्तविकता जानने की कोशिश कर रही है। ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
