दिल्ली विधानसभा चुनावः मुफ्त की योजनाएं और उनका अर्थशास्त्र

 

लोकसभा चुनाव में सभी सीटें जीतने वाली भाजपा को एक साल से कम समय में दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार मिली। इसके पीछे आम आदमी पार्टी की ऐसी योजनाओं को भी माना जा रहा है, जिन्हें ‘फ्रीबी’ यानी मुफ्त मिलने वाले फायदे कहा जा रहा है। इन्हें लेकर अर्थशास्त्रियों और राजनीतिज्ञों के अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन लगभग सभी राजनीतिक दल या प्रदेश इनका किसी न किसी तरह चुनावी वादों के रूप में उपयोग करते रहे हैं।

दूसरी ओर दिल्ली में जहां मध्य व निम्न मध्य वर्ग को फायदे पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, अन्य प्रदेशों में ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाभ पहुंचाने का प्रयास हो रहा है। केंद्र द्वारा किसानों और उद्योगों को राहत देने के लिए बड़े स्तर पर ऋण माफी और राइट ऑफ के कदम उठाए गए हैं। लेकिन सरकारी खजाने और अर्थव्यवस्था पर ये ‘फ्रीबी’ क्या असर डालती हैं, इस पर एक नजर-

दिल्ली : फ्री इंटरनेट पर 550 करोड़, बिजली-पानी पर 935 करोड़
दिल्ली सरकार ने फ्री वाईफाई इंटरनेट की घोषणा 2015 में की थी, जिसके 2019 में टेंडर जारी किए गए। इसके लिए 11 हजार हॉट स्पॉट लगाए जाएंगे। इससे 550 करोड़ का बोझ आएगा। वहीं महीने में 200 यूनिट बिजली और 20 हजार लीटर पानी तक के उपभोग पर शून्य बिल भेजे गए। इस बिजली के लिए 2019 में 535 करोड़ और पानी पर 400 करोड़ सरकार ने चुकाए। अर्थशास्त्रियों केे मुताबिक, महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा के लिए अक्तूबर में शुरू की गई स्कीम प्रदेश सरकार पर 350 करोड़ का सालाना बोझ डाल सकती है।

कृषि : छह साल, 10 राज्यों में 2.36 लाख करोड़ के कर्ज माफी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की सितंबर 2019 में जारी रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 से 2019-20 के दौरान 10 राज्यों ने 2.36 लाख करोड़ रुपये के किसानों के कर्ज माफ किए। यह 2020 में पेश पूरे भारत के बजट का 7.88 प्रतिशत है तो ग्रामीण विकास के लिए आवंटित1.38 लाख करोड़ से करीब 173 प्रतिशत ज्यादा है। कर्ज माफी का दबाव राज्यों को कृषि के विकास पर खर्च करने से रोक रहा है, वहीं बैंकों का एनपीए भी बढ़ा रहा है।

केंद्र : किसान सम्मान योजना  प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना दिसंबर 2018 से शुरू की गई। 2019-20 में इसके लिए 75 हजार करोड का प्रावधान है। इसके तहत 8.5 करोड़ लघु एवं सीमांत किसानों को सालाना छह हजार रुपये बैंक खातों में दिए जा रहे हैं।

उद्योगों को ‘राइट-ऑफ’…रिजर्व बैंक की अप्रैल 2019 के अनुसार एक दशक में बैंकों द्वारा ऋण लेने वालों के सात लाख करोड़ रुपये माफ किए गए। इनमें से 5.55 लाख करोड़ बीते पांच वर्ष के हैं। इनमें अधिकतर बड़े उद्योगपति घराने प्रमुख हैं।

जारी रहेगा…पश्चिम बंगाल में तैयारियां
पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। और यहां भी ताजा बजट में एससी-एसटी वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों को एक हजार रुपये मासिक पेंशन दी गई है, जिसका 3000 करोड़ रुपये बोझ आएगा।

प्रमुख राज्य    कर्ज माफी
आंध्र प्रदेश 24000
तेलंगाना   17000
तमिलनाडु   5280
महाराष्ट्र   34020
उत्तर प्रदेश   36360
पंजाब 10000
कर्नाटक 44000
राजस्थान   18000
मध्यप्रदेश   36500
छत्तीसगढ़   6100
सभी आंकड़े करोड़ रुपये में
(स्रोत : आरबीआई की कृषि क्रेडिट रिपोर्ट, सितंबर 2019).social-poll {margin:0px auto;width:300px;} .social-poll .poll-wrapper {box-sizing: border-box;}

 
 

Related posts

Top