यूरेनियम डील पर ‘क्रेडिट वॉर’! कांग्रेस का BJP पर तीखा वार, कहा- ‘पहले अपना होमवर्क ठीक से करें’

यूरेनियम डील पर ‘क्रेडिट वॉर’! कांग्रेस का BJP पर तीखा वार, कहा- ‘पहले अपना होमवर्क ठीक से करें’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैं. उनका यह दौरा देश के लिए कई मायनों में खास रहा. ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ यूरेनियम को लेकर डील कर ली है. भारतीय जनता पार्टी सोशल मीडिया पर इसका क्रेडिट ले रही है, लेकिन कांग्रेस ने इस मामले पर बीजेपी को आड़े हाथों लिया है. कांग्रेस ने शुक्रवार (10 जुलाई) को कहा कि साल 2011 में तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने अपनी पार्टी से भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी हासिल कर ली थी और यह स्वीकृति भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद मिली थी.

कांग्रेस की प्रतिक्रिया भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय के उस दावे के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार कर दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच यूरेनियम निर्यात समझौता हुआ है.

जयराम रमेश ने भाजपा के दावों को किया खारिज

भाजपा के दावों को खारिज करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘भाजपा का पूरा तंत्र यह दिखाने में जुटा है कि ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को यूरेनियम की बिक्री प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी उपलब्धि है. चार दिसंबर 2011 को तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने अक्टूबर 2008 के भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद अपनी पार्टी से भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी प्राप्त कर ली थी.’

उन्होंने कहा, ‘भाजपा के ‘ट्रोल’, जिनमें उसके कुछ सांसद भी शामिल हैं, उन्हें अपना ‘होमवर्क’ बेहतर ढंग से करना चाहिए.’

रमेश ने दिसंबर, 2011 की मीडिया रिपोर्ट का ‘स्क्रीनशॉट’ भी साझा किया, जिनमें कहा गया था कि ऑस्ट्रेलिया की लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम की बिक्री का रास्ता खोलने की योजना का समर्थन किया था.

यूरेनियम डील पर क्या बोले थे अमित मालवीय

इससे पहले मालवीय ने ‘एक्स’ पर कहा था, ‘2010 में ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने का हवाला देते हुए भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार कर दिया था. आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम निर्यात समझौता हुआ है.’

उन्होंने कहा, ‘यह केवल यूरेनियम का मामला नहीं है. यह वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ी हुई प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है. भारत अब प्रतिबंधों के नजरिये से नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है.’

रमेश ने गुरुवार को कहा था कि कांग्रेस नए आयाम बनाती है, जबकि भाजपा पलटी मारने में माहिर है.