‘तीसरी भाषा को अगले साल से लागू किया जाना चाहिए’, CBSE से बोला सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली। CBSE की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर इसके लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने सुझाव दिया है कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में कक्षा 6 में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की अनिवार्यता से राहत देने पर विचार किया जाए और इसे अगले वर्ष से लागू किया जा सकता है।
अचानक लागू करने पर कोर्ट की चिंता
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि बच्चों पर अचानक अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए। इससे पहले 20 अगस्त को भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नीति लागू करने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन इसके कार्यान्वयन के तरीके और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव को ध्यान में रखना जरूरी है।
कोर्ट ने सुझाव दिया था कि यदि कक्षा 6 को तीसरी भाषा शुरू करने का स्तर माना गया है, तो मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को एक साल की राहत दी जा सकती है और नीति अगले वर्ष से लागू की जा सकती है।
CBSE ने मांगा समय
सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संबंधित अधिकारी इस मुद्दे पर विचार करेंगे और अदालत को जवाब देंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर 2026 के लिए तय की थी।
क्या है CBSE की तीन भाषा नीति?
CBSE की नई व्यवस्था के तहत छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप लागू की जा रही है। नीति को लेकर अभिभावकों की ओर से अदालत में याचिकाएं दायर की गई हैं।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि कक्षा 6 से 8 के पाठ्यक्रम को लेकर CBSE के अधिकार क्षेत्र और पर्याप्त शिक्षकों तथा अध्ययन सामग्री की उपलब्धता की स्थिति क्या है।
