‘अग्निपरीक्षा’ से पहले जयपुर से भोपाल लौटे कांग्रेस विधायकों का कोरोना टेस्ट, कोई पॉजिटिव नहीं

 
हाइलाइट्स
  • मध्यप्रदेश में सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले कांग्रेस विधायकों का कोरोना टेस्ट हुआ
  • जयपुर से जितने भी विधायक भोपाल लौटे हैं उन सभी लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है
  • इसके अलावा हरियाणा और बेंगलुरु से आने वाले विधायकों का भी कोरोना टेस्ट होने की चर्चा है
  • एमपी के राज्यपाल लालजी टंडन ने कमलनाथ सरकार को बहुमत साबित करने के निर्देश दिए हैं

भोपाल
मध्यप्रदेश में सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले कांग्रेस विधायकों का कोरोना टेस्ट हुआ। मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि जयपुर से जितने भी विधायक भोपाल लौटे हैं उन सभी का कोरोना टेस्ट हो रहा है। इसके अलावा हरियाणा और बेंगलुरु से आने वाले विधायकों का भी कोरोना टेस्ट होने की चर्चा है।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने कमलनाथ सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में मौजूदा हालात बेहद गंभीर हैं और सीएम कमलनाथ 16 मार्च को सदन में बहुमत साबित करें। इसको लेकर राजभवन ने शनिवार आधी रात को मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक पत्र भेजा था।


कांग्रेस ने विधायकों को जारी किया विप, भोपाल वापस बुलाया

कांग्रेस ने शनिवार को ही अपने विधायकों को विप जारी करते हुए 16 मार्च से 13 अप्रैल तक चलने वाले विधानसभा में मौजूद रहने और सत्ता पक्ष के समर्थन में वोटिंग का निर्देश दिया था। इसी के चलते कांग्रेस ने अपने जिन विधायकों को बसों के जरिए जयपुर भेजा था, उन्हें रविवार को वापस बुला लिया। विधायकों की वापसी पर उनकी कोरोना वायरस की जांच करवाने का फैसला लिया गया है। कोरोना वायरस का टेस्ट करने वाली डॉक्टरों की टीम भोपाल के उस होटल में पहुंची, जहां विधायक ठहरे हुए हैं।

NBT

कांग्रेस विधायक की जांच करते डॉक्टर

16 मार्च को बहुमत परीक्षण पर संशय बरकरार
हालांकि कमलनाथ सरकार सोमवार को विधानसभा में बहुमत साबित करेगी या नहीं, इस पर संशय बरकरार है। दरअसल बेंगलुरु में डेरा डाले सिंधिया गुट के 19 विधायकों की वापसी को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई है। विधायकों ने शनिवार को राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर भोपाल वापसी पर सुरक्षा की मांग की है।
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6 बागियों के इस्तीफे स्वीकार, 16 पर फैसला नहीं
गौरतलब है कि कांग्रेस के बागी 22 विधायक विधानसभा की सदस्यता से अपना त्यागपत्र भेज चुके हैं। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने इनमें से छह विधायकों के त्यागपत्र शनिवार शाम को स्वीकार कर लिए, जबकि 16 विधायकों के त्यागपत्र पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। इन विधायकों के रविवार रात या सोमवार सुबह बेंगलुरु से भोपाल पहुंचने की उम्मीद है। इन 22 विधायकों में से 19 बेंगलुरू में एक रिजॉर्ट में है, जबकि तीन विधायकों का अबतक कोई पता-ठिकाना नहीं है।

समझें सदन का गणित

230 सदस्यीय विधानसभा में दो विधायकों के निधन के बाद सदस्य 228 रह गए थे। सिंधिया समर्थकों के बगावत से पहले कमलनाथ सरकार को 121 विधायकों का समर्थन था। इसमें कांग्रेस के 114, बीएसपी के 2, एसपी के एक और 4 निर्दलीयों का समर्थन था। अब कांग्रेस के 6 बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 112 (कुल 222) हो गया है।

यदि अब स्पीकर 16 विधायकों के इस्तीफे स्पीकर स्वीकार करते हैं तो उन विधायकों की सदस्यता चली जाएगी और ऐसे में कांग्रेस के पास 92 विधायक रह जाएंगे और बीजेपी के पास 107 विधायक होंगे। उस स्थिति में सदन में कुल विधायक 206 रह जाएगी और बहुमत का आंकड़ा 104 पर आ जाएगा। ऐसे में बीजेपी फ्लोर टेस्ट में बाजी मार सकती है।

 
 

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