दिल्ली से कांग्रेस का बड़ा चुनावी मिशन शुरू, दलित-अल्पसंख्यक एकजुटता पर फोकस; 6 जून से अभियान का आगाज
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रणनीति को नई दिशा देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी अब दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण समुदायों को एक साझा मंच पर लाने की कवायद में जुट गई है। इस व्यापक सामाजिक गठबंधन की शुरुआत दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को जोड़ने के अभियान से होगी, जिसकी औपचारिक शुरुआत 6 जून को दिल्ली से की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग और अल्पसंख्यक विभाग ने मिलकर एक नई सोशल इंजीनियरिंग रणनीति तैयार की है। पार्टी का मानना है कि सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार और प्रतिनिधित्व जैसे साझा मुद्दों के आधार पर इन वर्गों के बीच मजबूत राजनीतिक और सामाजिक समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय चेयरपर्सन राजेंद्र पाल गौतम ने बताया कि पार्टी जल्द ही एक राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित करेगी, जिसमें दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ-साथ गरीब पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा। इसके बाद एक बड़े राष्ट्रीय सम्मेलन की योजना है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
दिल्ली से शुरू होगा अभियान
6 जून को दिल्ली में होने वाले संयुक्त सम्मेलन को इस अभियान की पहली बड़ी कड़ी माना जा रहा है। सम्मेलन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, कलाकार तथा सिविल सोसायटी के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। बैठक में दलित और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक मुद्दों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
दिल्ली में तैयार होने वाले रोडमैप को पार्टी नेतृत्व के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों में भी इसी तरह के सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई गई है।
35 से 40 फीसदी वोट बैंक पर नजर
कांग्रेस की नजर उन राज्यों पर है जहां दलित और अल्पसंख्यक समुदाय मिलकर 35 से 40 प्रतिशत तक प्रभाव रखते हैं। पार्टी को उम्मीद है कि इन वर्गों को एक साझा राजनीतिक मंच पर जोड़कर चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में किया जा सकता है। भविष्य में इस गठबंधन में अति पिछड़े वर्गों, व्यापक ओबीसी समाज और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को भी शामिल करने की रणनीति पर काम किया जाएगा।
‘संविधान बचाओ’ अभियान से मिली प्रेरणा
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के ‘संविधान बचाओ’ अभियान को दलित समाज का व्यापक समर्थन मिला था। पार्टी अब उसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक न्याय, समान अवसर और प्रतिनिधित्व के मुद्दों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखने की तैयारी कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने हाल ही में अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं के साथ हुई बैठकों में यह भी जोर दिया कि किसी भी समुदाय के साथ होने वाले अन्याय और भेदभाव के मामलों को मजबूती से उठाया जाना चाहिए और पार्टी नेताओं को इन मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए।
