वतन लौटते ही भारतीयों की आंखों में आया आंसुओं का सैलाब, पैर रखते ही जमीन पर माथा टेककर किया सजदा

 

लखनऊः कोरोना वायरस के चलते दूसरे राज्यों में फंसे लोगों से वापस बुलाने के बाद अब विदेशों से भारतीय नागरिकों को वापस लाने की कवायद तेज है। ऐसे में वंदे मातरम मिशन के तहत शनिवार की देर शाम लखनऊ एयरपोर्ट पर शारजाह से भारतीयों को लेकर एक विमान पहुंचा। वहीं जब भारतीय अपने वतन की धरती पर उतरे तो उनके चेहरे की चमक देखने वाली थी। ऐसे में भारतीय होने का प्रमाण देते हुए कुछ ने आंखों में अश्रू लिए वतन की मिट्टी को सलाम किया, लेकिन वतन से दूर इन लोगों के अपनी-अपनी दर्द भरी कहानी है। ऐसे में इनसे बातचीत की गई तो वह दर्द बयां किए बगैर रह नहीं सके। वतन लौेटे भारतीयों के दर्द की कहानी, उन्हीं की जुबानी…
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भारत लौटने पर बहुत ही प्राउड फील कर रहा हूं… मुझे अपने भारत पर गर्व-साजिद

शुरुआत करते हैं पेशे से फैशन डिजाइनर अयोध्या के रहने वाले मोहम्मद साजिद से। उनका कहना है कि मैं ढाई माह से सऊदी में फंसा था। कोरोना के कारण वहां बहुत सख्ती है। खाने पीने की दिक्कत नहीं थी। धीरे-धीरे राशन और पैसे खत्म हो रहे थे। इस दौरान मन में कई तरह के ख्याल आते थे। लगता था कि अब शायद ही अपने देश लौट पाऊं। घर वालों से बात होती थी तो आंखों में आंसू आ जाते थे। यहां घर वाले तो वहां मैं बेबस था। 28 मार्च को आना था, लेकिन जिस फ्लाइट से आना था वह कैंसिल हो गई। मुझे टिकट के लिए पैसे दूसरे से लेना पड़ा। क्योंकि मैंने पहले ही भारत से ही रिटर्न टिकट करवा रखा था। जब से लॉकडाउन हुआ तब से मैं लगातार इंडियन एम्बेसी के संपर्क में था। कभी कॉल तो कभी मेल करता था। जैसे ही मुझे पता चला कि स्पेशल फ्लाइट आने वाली है। उस वक्त मुझे कितनी खुशी मिली, मैं बयां नहीं कर सकता।’ यह कहते हुए साजिद रोने लगे। उन्होंने एयरपोर्ट पर झुककर अपनी मिट्टी का सजदा किया। साजिद ने फिर कहा, ‘मैं अब शायद ही विदेशी वापस जाऊं, मुझे भारत में रहकर अपना काम करना है। मैं भारत लौटने पर बहुत ही प्राउड फील कर रहा हूं। मुझे अपने भारत पर गर्व है।’
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बेटियों की शादी के लिए कमाने गया, उधार लेकर लौटा हूं- शंकर यादव 
वहीं प्रयागराज के शंकर यादव का कहना है कि अपने वतन में काम नहीं मिला तो मैं किसी के जरिए एक कंपनी में सुपरवाइजर बनकर 2 साल पहले सऊदी चला गया था। महीने का अच्छा खासा कमा लेता था। उसी से घर भी चल रहा था। परिवार प्रयागराज में ही रहता है। जब लॉकडाउन हुआ तो वहां के सख्त नियमों के कारण निकलना ही बन्द हो गया। शुरुआत में तो ठीक था, लेकिन धीरे धीरे पैसे खत्म होने लगे। नौबत यह आ गई कि एक वक्त का खाना खाकर गुजारा करना पड़ा। कंपनी में ही रुकना पड़ा था। हमारे साथ कुछ और भी लोग थे। सब लोग बहुत डरे हुए थे। दिमाग में यही चल रहा था कि क्या अब अपने परिवार का मुंह देख सकूंगा या नहीं। या यहीं हमें मरना होगा। भारत आने के लिए मैं ऐप के जरिए एम्बेसी के संपर्क में था। जैसे ही पता चला मैंने अपना टिकट करवाया और चला आया। इस महामारी ने यह बात समझा दी है कि भले ही एक रोटी कम खाने को मिले लेकिन अब काम यही करेंगे। अब दोबारा हम विदेश नही जाएंगे। बेटियों की शादी के लिए कमाने गया, उधार लेकर लौटा हूं।
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रोजी रोटी के लिए दुबई गए, लेकिन कोरोना ने रोजी रोटी छीन ली- प्रमोद यादव 
कुशीनगर के रहने वाले प्रमोद यादव पांच माह पहले रोजी रोटी के लिए दुबई गए थे, लेकिन कोरोना ने रोजी रोटी छीन ली। अपने वतन लौटने की खुशी प्रमोद के चेहरे पर साफ झलक रही थी। लेकिन मन में कहीं न कहीं एक मायूसी भी थी। वह कहते हैं, ‘घर में दो बेटियां हैं, उनकी शादी करनी हैं। रिश्तेदारों और दोस्तों से पैसे उधार लेकर दुबई गया था। सोचा था कि कर्ज भी चुका दूंगा और बेटियों की शादी भी कर दूंगा। लेकिन सब उल्टा हो गया। थोड़े बहुत जो पैसे थे, वह लॉकडाउन में खर्च हो गए। कंपनी ने हमें बताया कि स्पेशल फ्लाइट भारत जा रही है, जाना हो तो टिकट करा लो। वहां मेरे पास टिकट के भी पैसे नही थे। दोस्तों से उधार लिए तब टिकट कराकर वापस आ पाया हूं। अब सोच रहा हूं कि आगे की जिंदगी कैसे चलेगी? ‘
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‘पैसों की किल्लत के चलते पति ने पत्नी को लखनऊ भेजा, खुद दुबई में’
लखनऊ के रहने वाली शकुंतला 2 महीने पहले अपने पति के पास दुबई गई थीं। शकुंतला कहती हैं, ‘मेरे पति वहां पर काम करते हैं। कोरोना वायरस की वजह से लॉकडाउन हुआ और सभी लोग वहां फंस गए। इस दौरान फाइनेंशियल प्रॉब्लम का सामना करना पड़ा। वहां पर कोई भी मदद करने वाला नहीं था। ट्विटर से पता चला कि भारत सरकार दुबई में फंसे लोगों को भारत वापस लाएगी तब उन्होंने मेरा 15 हजार रुपए में टिकट कराकर वापस भेज दिया। फाइनेंशियल दिक्कत होने की वजह से मेरे पति वापस नहीं लौटे हैं। मुझे उनकी चिंता है।”

बीते एक महीने से एक टाइम में खाना खा रहा हूं-अरविंद सिंह
कुशीनगर के रहने वाले अरविंद सिंह कहते हैं, ‘कोरोना की वजह से दो महीने से फंसे हुए थे। शुरू में तो कंपनी ने ख्याल रखा, लेकिन 20 दिन बीतने के बाद कंपनी वालों ने दो टाइम की जगह एक टाइम खाना देना शुरू कर दिया। बीते एक महीने से एक टाइम में खाना खा रहा हूं। मैं लगातार कंपनी के लोगों से भारत लौटने के बारे में पूछता रहता था। उन्होंने आश्वस्त किया था कि जैसे ही कोई फ्लाइट चलेगी बताएंगे। इसी बीच मुझे न्यूज के जरिए जानकारी मिली कि भारत सरकार दुबई में फंसे लोगों को भारत वापस लाने के लिए फ्लाइट भेजेंगी। मैंने तत्काल भारतीय राजदूत कार्यालय में संपर्क किया और टिकट बुक करा लिया। मैं भारत लौट आया हूं। मैं बहुत खुश हूं। लेकिन मेरे कई साथी वहां पर फंसे हुए हैं। सऊदी अरब में कोरोना वायरस की वजह से बहुत ही ज्यादा दिक्कतें हैं। जिनका सामना करना सभी लोगों की बस की बात नहीं है।’

 
 

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