‘जो जिम्मेदारी मिलेगी वो…’ UP कांग्रेस अध्यक्ष की रेस में आराधना मिश्रा का बयान
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष के बदले जाने की संभावनाओं के बीच रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा मोना ने अहम बयान दिया है. एबीपी न्यूज़ से बातचीत में आराधना ने कहा कि यूपी में कांग्रेस महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और पार्टी उन्हें जो जिम्मेदारी देगी, वो उसे निभाएंगी.
आराधना मिश्रा से पूछा गया कि क्या वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा एक बार फिर यूपी में एक्टिव होंगी? विधायक ने कहा- यूपी उनका घर है. वह हमेशा यहां सक्रिय रहती हैं. वो हमारे दिल में रहती हैं.
साल 2022 में कांग्रेस के लड़की हूं, लड़ सकती हूं नारे के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर आराधना ने कहा कि मैं उसका सबसे बड़ा उदाहरण हूं. तीन बार पार्टी ने मुझे मौका दिया. सीएलपी बनाया. सदन में जिम्मेदारी दी. मैं तो कहूंगी कि यह लाइन मुझ पर फिट बैठती है. केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण विधेयक को पास कराने के बाद उसे लागू न करने का आरोप लगाते हुए आराधना ने कहा कि केंद्र ने झूठ बोला. मैं आपको याद दिलाती हूं कि साल 2022 के चुनाव में कांग्रेस ने 40 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया.
महिलाओं के लिए हमारा ये कमिटमेंट है. हम इसको लेकर आगे बढ़ेंगे. यह पूछे जाने पर कि जिम्मेदारी और बढ़ेगी? रामपुर खास की विधायक ने कहा कि हमेशा से जिम्मेदारी निभाई है और हमेशा निभाऊंगी.
कांग्रेस अगर आराधना मिश्रा पर दांव लगाती है तो इसके जरिए एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश मानी जा सकती है. एक तरफ कांग्रेस की नजर महिला वोटर्स यानी आधी आबादी पर होगी, तो दूसरी तरफ ब्राह्मण वोट बैंक को साधने का संदेश जाएगा.
आराधना मिश्रा कौन हैं?
आराधना मिश्रा राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं. प्रमोद तिवारी यूपी के प्रमुख ब्राह्मण नेताओं में शुमार होते हैं. आराधना मिश्रा यूपी कांग्रेस का प्रमुख महिला चेहरा हैं. वह यूपी विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता भी रह चुकी हैं. उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई की है और एमबीए किया है. रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुनी गई हैं. यानी आराधना मिश्रा के जरिए कांग्रेस महिला नेतृत्व के साथ-साथ ब्राह्मण चेहरे को भी आगे करने का सियासी संदेश दे सकती है.
अजय राय की छुट्टी तय… क्या है वजह?
कांग्रेस यूपी में संगठन में बदलाव की तैयारी में है. चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अजय राय की जगह आराधना मिश्रा को जिम्मेदारी दी जा सकती है. इसके पीछे कई सियासी वजहें बताई जा रही हैं-पार्टी प्रभारी के साथ अंदरखाने खटपट, सीट शेयरिंग को लेकर समाजवादी पार्टी से खींचतान, यूपी में भूमिहार समाज की सीमित आबादी और ब्राह्मण वोटर्स को साधने की कांग्रेस की रणनीति है.
