‘किसानों की आय दोगुनी नहीं, कर्ज चार गुना बढ़ा’, महापंचायत में बोले टिकैत
जालौन के उरई स्थित मंडी परिषद में आयोजित विशाल किसान महापंचायत में पहुंचे किसाने नेता राकेश टिकैत ने किसानों की बदहाल आर्थिक स्थिति, अतिवृष्टि से बर्बाद फसलों, कर्जमाफी और बुंदेलखंड के लिए अलग आर्थिक पैकेज की मांग उठाई. उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था, लेकिन किसानों की आय बढ़ने के बजाय उन पर कर्ज का बोझ कई गुना बढ़ गया है.
टिकैत ने कहा कि बुंदेलखंड की भौगोलिक परिस्थितियां दूसरे क्षेत्रों से अलग हैं. अतिवृष्टि और जलभराव से खरीफ की फसलें बर्बाद हो रही हैं. खेतों में पानी भरने के बाद निकासी नहीं हो पाने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने मांग की है कि प्रभावित किसानों को जल्द और पूरा मुआवजा दिया जाए तथा बुंदेलखंड के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए.
‘पलायन को मजबूर बुंदेलखंड के किसान’
किसान नेता ने कहा कि खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं होने के कारण बुंदेलखंड के लोग पलायन करने को मजबूर हैं. सरकार को किसानों की कर्जमाफी के साथ कृषि उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना चाहिए. उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य को प्रभावी बनाने की मांग भी उठाई.
राकेश टिकैत ने की किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग
राकेश टिकैत ने बुंदेलखंड की खनिज संपदा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि खनन और प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली आर्थिक गतिविधियों में स्थानीय किसानों, मजदूरों और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए. उन्होंने जमीन अधिग्रहण में किसानों को बाजार दर के अनुसार उचित मुआवजा देने और बटाईदार किसानों को भी फसल नुकसान का पूरा लाभ दिलाने की मांग की.
चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों पर दी प्रतिक्रिया
बिजली संशोधन विधेयक और प्रस्तावित व्यापार समझौतों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की आजीविका और कृषि क्षेत्र पर इनके संभावित प्रभावों को ध्यान में रखना चाहिए. चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी उन्होंने सवाल उठाए और निष्पक्ष चुनाव की आवश्यकता बताई. हालांकि, टिकैत ने किसी राजनीतिक दल का समर्थन करने से इनकार करते हुए कहा कि भारतीय किसान यूनियन किसानों के मुद्दों पर संघर्ष करती है.
उन्होंने कहा कि किसान हितों को लेकर जिला स्तर पर महापंचायतों और जनसंवाद का अभियान चलाया जाएगा. जालौन से बुंदेलखंड अभियान की शुरुआत की गई है. टिकैत ने युवाओं से किसानों के अधिकारों के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि लंबित मांगों को लेकर किसानों की आवाज लगातार उठाई जाती रहेगी.
