अरविंद केजरीवाल- सौरव दास के खिलाफ याचिकाकर्ता का दावा, ‘सोशल मीडिया पर…’
दिल्ली हाईकोर्ट को बताया गया कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, पार्टी के कुछ अन्य नेताओं और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के खिलाफ कथित अवमाननापूर्ण पोस्ट अब तक पूरी तरह नहीं हटाए हैं. यह दावा याचिकाकर्ता अशोक चैतन्य ने किया.
पिछली सुनवाई के बाद फिर उठे सवाल
दिल्ली हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता अशोक चैतन्य ने जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की बेंच को बताया कि पिछली सुनवाई में उन्होंने कोर्ट को बताया था कि संबंधित ट्वीट हटा दिए गए हैं, लेकिन उनके मुताबिक जांच करने पर पता चला कि वही कंटेंट सोशल मीडिया पर अब भी उपलब्ध है और उसे पूरी तरह हटाया नहीं गया है.
अदालत ने सबूत रिकॉर्ड पर लाने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि जिन पोस्ट या अन्य सामग्री के अब भी सोशल मीडिया पर मौजूद होने का दावा किया जा रहा है उन्हें संबंधित दस्तावेजों के साथ रिकॉर्ड पर लाया जाए. यानी फिलहाल अदालत ने इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है.
केजरीवाल समेत पांच को जवाब के लिए छह हफ्ते
इसी मामले में कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल समेत पांच लोगों को अदालत की ओर से शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही में जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है. मई 2026 में सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो को लेकर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी.
आबकारी नीति मामले की सुनवाई से जुड़ा है विवाद
यह पूरा विवाद दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया. जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा के सामने मामले की सुनवाई के दौरान केजरीवाल और अन्य की ओर से जज के मामले से अलग होने यानी recusal की मांग की गई थी. जस्टिस शर्मा ने उस मांग को खारिज कर दिया था. बाद में आबकारी नीति से जुड़ा मामला दूसरी सिंगल बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया.
सोशल मीडिया अभियान का लगाया गया आरोप
याचिकाकर्ता अशोक ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि जज के खिलाफ सोशल मीडिया एक्स पर एक सुनियोजित अभियान चलाया गया. उनके मुताबिक पोस्ट में जज के परिवार के सदस्यों की पेशेवर गतिविधियों को लेकर कथित हितों के टकराव, पक्षपात और अनुचित आचरण जैसे आरोप लगाए गए थे. ये आरोप याचिकाकर्ता के हैं और अदालत ने अभी इन पर अंतिम फैसला नहीं दिया है.
