UPI चार्ज पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- ‘दुकानदारों से फीस ली तो जनता पर पड़ेगा बोझ’

UPI चार्ज पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- ‘दुकानदारों से फीस ली तो जनता पर पड़ेगा बोझ’

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने UPI ट्रांजैक्शन पर संभावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता खोल दिया है। राहुल गांधी का दावा है कि आगे चलकर इसका बोझ ग्राहकों पर पड़ सकता है।

‘2 हजार से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लग सकता है MDR’

राहुल गांधी ने सरकार के हालिया नोटिफिकेशन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाए जाने की संभावना बन गई है। उन्होंने कहा कि भले ही 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन संख्या के लिहाज से कम हों, लेकिन UPI के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनका हिस्सा काफी बड़ा है।

हालांकि, सरकार ने अभी MDR की कोई दर घोषित नहीं की है और न ही 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क लगाया गया है।

वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन में क्या है?

14 सितंबर के वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि बैंक और सिस्टम प्रोवाइडर 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन या RuPay से किए गए डेबिट कार्ड भुगतान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क नहीं लगा सकते।

नए फ्रेमवर्क के तहत सरकार उन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों या ट्रांजैक्शन की श्रेणियों को अधिसूचित कर सकती है, जिन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसी वजह से 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट पेमेंट को लेकर नई बहस शुरू हुई है।

राहुल गांधी ने पूछा- ‘दुकानदारों की फीस कौन देगा?’

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार ग्राहकों से सीधे कोई शुल्क नहीं लेने की बात करती है, तो दुकानदारों पर लगने वाली फीस का भुगतान आखिर कौन करेगा। उनका तर्क है कि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों पर डाल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में डिजिटल पेमेंट आम लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से महंगा हो सकता है।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का लगाया आरोप

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि UPI से जुड़े नियमों में यह बदलाव अमेरिकी पेमेंट कंपनियों की मांगों के अनुरूप है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-MDR नीति का विरोध करती रही हैं।

राहुल गांधी ने इस मुद्दे को भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने का आरोप भी लगाया।

UPI पर जीरो-MDR व्यवस्था

भारत में जनवरी 2020 से UPI के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन पर जीरो-MDR व्यवस्था लागू है। सरकार डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करने के लिए इंसेंटिव स्कीम के जरिए समर्थन देती रही है।

नए बदलाव के बाद 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन को शुल्क से सुरक्षा मिलती है, जबकि इससे अधिक मूल्य वाले मर्चेंट पेमेंट के लिए भविष्य में अलग शुल्क व्यवस्था बनाए जाने की गुंजाइश दिखाई दे रही है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर अभी कोई MDR लागू नहीं हुआ है। MDR की दर और उसके लागू होने की स्थिति को लेकर आगे सरकार के अलग नियम या अधिसूचना का इंतजार रहेगा।

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