सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD की कार्रवाई तेज, 51 जर्जर इमारतें मिलीं
27 इमारतों को गिराने के आदेश, 7 सील; 35 भवन मालिकों को नोटिस
नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर सात होने के बाद नगर निगम (MCD) ने जर्जर और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। हादसे वाली इमारत के आसपास मौजूद खतरनाक भवनों को भी गिराने की तैयारी शुरू हो गई है। डिमोलिशन से पहले कमजोर इमारतों को लोहे के बीम से सहारा दिया जा रहा है, ताकि कार्रवाई के दौरान आसपास की संपत्तियों और टीम को नुकसान से बचाया जा सके।
सत्य निकेतन में 51 जर्जर इमारतें मिलीं
MCD की टीम ने तीन जोन में चल रहे निजी हॉस्टल और PG का सर्वे किया। इस दौरान कुल 51 इमारतें खतरनाक और जर्जर पाई गईं। इनमें से 27 इमारतों को तत्काल गिराने के आदेश दिए गए हैं। सात इमारतों को सील किया गया है, जबकि 35 भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। बुधवार से वेस्ट जोन और शाहदरा साउथ जोन में जर्जर इमारतों के खिलाफ डिमोलिशन की कार्रवाई शुरू की जा रही है।
सत्य निकेतन में हॉस्टल डेज के पास स्थित जर्जर इमारत को भी गिराने की तैयारी चल रही है। मंगलवार को इमारत की छत पर बने वॉटर प्लांट और कैंटीन को हटाया गया। टिन शेड को गैस कटर से काटकर हटाने के बाद अब इमारत को सुरक्षित तरीके से गिराने की तैयारी की जा रही है।
दरकती दीवारों के बीच रहने को मजबूर थे छात्र
सर्वे के दौरान सामने आया कि कई जर्जर इमारतों में छात्र अभी भी रह रहे थे। PG में रहने वाले कुछ छात्रों ने वीडियो बनाकर अपनी परेशानी सामने रखी। एक वीडियो में छात्र दीवारों में आई दरारों को दिखाते हुए इमारत का हिस्सा गिरने की आशंका जताते नजर आए।
सत्य निकेतन हादसे के बाद बड़ी संख्या में छात्र इलाका छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश कर रहे हैं। हादसे को लेकर छात्रों के परिजनों में भी चिंता और नाराजगी है।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद सर्वे तेज
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD की टीमें लगातार PG और छात्र हॉस्टलों का निरीक्षण कर रही हैं। हाईकोर्ट की फटकार के बाद अधिकारी हॉस्टलों में जाकर फायर NOC, हॉस्टल संचालन की अनुमति और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।
सर्वे में कई ऐसी इमारतें भी मिलीं, जहां इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था नहीं थी। कुछ भवन मालिकों के पास फायर विभाग की NOC भी नहीं मिली। ऐसे भवनों को सील करने की कार्रवाई की जा रही है।
मंगलवार को लक्ष्मी नगर, ललिता पार्क और शकरपुर के 35 PG को नोटिस जारी किए गए। कुछ PG में फायर NOC नहीं मिली, जबकि कुछ जगहों पर आने-जाने के लिए सिर्फ एक रास्ता था। MCD ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों में सुधार नहीं होने पर इन PG को सील किया जा सकता है।
तीन महीने में 959 संपत्तियों पर कार्रवाई
MCD के अनुसार, दिल्ली में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ पिछले तीन महीने से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 1 जून से 31 अगस्त के बीच 959 संपत्तियों के खिलाफ डिमोलिशन की कार्रवाई की गई। वहीं 1 जून से 8 सितंबर के बीच 471 संपत्तियां सील की गईं और 1,551 अनधिकृत निर्माणों को लेकर शो-कॉज नोटिस जारी किए गए। इसी अवधि में अवैध निर्माण गिराने के लिए 753 डिमोलिशन ऑर्डर भी जारी किए गए।
सत्य निकेतन हादसे में एक और गिरफ्तारी
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के मामले में पुलिस की कार्रवाई भी जारी है। सोमवार को गिरफ्तार किए गए हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।
पुलिस पूछताछ में महेश ने बताया कि वह अपने माता-पिता की ओर से इमारत के रखरखाव का काम देखता था। उसके मुताबिक, अगस्त 2025 में यह इमारत ‘हॉस्टल डेज’ नाम के PG संचालकों को लीज पर दी गई थी।
महेश के अनुसार, इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए जगह बढ़ाने का काम भी किया जा रहा था। हादसे के दिन स्थानीय लोगों से इमारत गिरने की सूचना मिलने के बाद वह घर से निकलकर राजस्थान के भिवाड़ी स्थित अपने ससुराल चला गया था।
इस मामले में पुलिस ने लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया है। उसे पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है।
PG के लिए नया कानून लाने की तैयारी
एक ओर दिल्ली में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है, वहीं दूसरी ओर PG और हॉस्टल को नियमों के दायरे में लाने की तैयारी भी की जा रही है। दिल्ली सरकार ‘पेइंग गेस्ट एकॉमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल’ विधानसभा में पेश करने की तैयारी कर रही है।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, किराए में मनमानी पर रोक लगाना और PG में रहने वालों की शिकायतों का समाधान करना है। इसके तहत दिल्ली में संचालित प्रत्येक PG का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन होगा। संचालकों को 90 दिनों के भीतर जोन अथॉरिटी से ऑपरेटिंग लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए पुलिस, MCD और स्थानीय प्रशासन से जरूरी NOC लेने का प्रावधान होगा।
रजिस्ट्रेशन के बाद प्रत्येक PG को एक यूनिक PG रजिस्ट्रेशन नंबर (PGRN) दिया जाएगा।
GovPG पोर्टल पर मिलेगी पूरी जानकारी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत GovPG पोर्टल बनाया जाएगा। इस पर PG और हॉस्टल से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होगी। इसमें PG की लिस्टिंग, किराया, सुविधाएं और सुरक्षा संबंधी जानकारी शामिल होगी।
छात्र इसी पोर्टल के जरिए गुमनाम शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। शिकायतकर्ता की पहचान उजागर किए बिना शिकायत पर कार्रवाई किए जाने का प्रावधान प्रस्तावित है।
किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट पर भी लगाम
प्रस्तावित कानून में PG के किराए को लेकर भी नियम बनाए जाने की बात है। रेंट रेगुलेशन कमेटी क्षेत्र के हिसाब से किराए की सीमा तय करेगी। PG संचालक अधिकतम तीन महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट ले सकेंगे। तीन महीने से अधिक का एडवांस लेने पर रोक होगी।
PG खाली करने के लिए 30 दिन का नोटिस देना होगा। इसके अलावा लिंग, जाति, धर्म या मूल राज्य के आधार पर किसी छात्र के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकेगा।
PG में CCTV और गार्ड अनिवार्य करने का प्रस्ताव
प्रस्तावित नियमों में PG की सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया है। सभी प्रवेश द्वार और कॉमन एरिया में CCTV कैमरे लगाना जरूरी होगा। इनकी फुटेज कम से कम 30 दिन तक सुरक्षित रखनी होगी।
जिन PG में 15 से अधिक छात्र रहेंगे, वहां रात के समय सुरक्षा गार्ड रखना अनिवार्य होगा। PG और हॉस्टल में विजिटर रजिस्टर भी बनाए रखना होगा। इसके अलावा छात्रों की सुरक्षा के लिए PG से 500 मीटर के दायरे में वार्डन की उपलब्धता का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
