शोभित विश्वविद्यालय गंगोह के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड एनवायरमेंटल साइंसेज विभाग द्वारा पार्थेनियम घास के दुष्प्रभावों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

शोभित विश्वविद्यालय गंगोह के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड एनवायरमेंटल साइंसेज विभाग द्वारा पार्थेनियम घास के दुष्प्रभावों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

गंगोह [24CN] : शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड एनवायरमेंटल साइंसेज विभाग द्वारा दिनांक 22 अगस्त दिन शनिवार को पार्थेनियम घास के दुष्प्रभावों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह विशेष जागरूकता एवं उन्मूलन कार्यक्रम 16 से 22 अगस्त तक 21वें गाजर घास (पार्थेनियम) मुक्त सप्ताह के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह के कुलपति प्रो.(डॉ.) बी. एस. सिद्धू, कुलसचिव प्रो.(डॉ.) महिपाल सिंह एवं डीन एकेडमिक्स, प्रो.(डॉ.) तरुण कुमार शर्मा ने जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर विद्यार्थियों को रैली के लिए रवाना किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. रजनीश पाल और बद्रीश तिवारी ने जागरूकता रैली व उन्मूलन कार्यक्रम के सन्दर्भ में बताया कि गाजर घास फसलों की पैदावार प्रभावित करने के साथ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है। साथ ही उन्होंने बताया कि इसके संपर्क में आने से मनुष्यों में एलर्जी, त्वचा रोग और सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इस सन्दर्भ में छात्रों को पार्थेनियम के इतिहास, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर इसके गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में भी जानकारी दी गई कि यह खरपतवार मेक्सिको से गेहूं के बीज के साथ भारत आया था और इसे 1956 में पुणे में पहली बार देखा गया।

इस अवसर पर शोभित विश्वविद्यालय गंगोह के कुलपति प्रो.(डॉ.) बी. एस. सिद्धू ने कार्यक्रम के आयोजकों को अनेक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण विषयों के प्रति संवेदनशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर शोभित विश्वविद्यालय गंगोह के कुलसचिव प्रो.(डॉ.) महिपाल सिंह ने कार्यक्रम के आयोजकों एवं सभी विद्यार्थियों को अनेक शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय परिसर को पार्थेनियम मुक्त बनाने के लिए विशेष उन्मूलन अभियान चलाया गया, जिसमें शिक्षकों और छात्रों ने श्रमदान किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. शिवानी और समस्त संकाय सदस्यों का सक्रिय सहयोग रहा।

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