CJP प्रदर्शन मामले में CJI ने मीडिया रिपोर्टों को बताया गलत, बोले- याचिका दायर ही नहीं हुई थी
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक के विरोध में हुए ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को मीडिया में प्रसारित उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने इस मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई विधिवत रिट याचिका दायर ही नहीं की गई थी, इसलिए सुनवाई से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि मीडिया में आई खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग का उदाहरण हैं।
‘सिर्फ एक पत्र मिला था, याचिका नहीं’
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पिछले दो दिनों से यह गलत प्रचार किया जा रहा है कि मामला अदालत में दायर किया गया था। उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे तक अदालत के रिकॉर्ड में इस संबंध में एक भी पन्ने की याचिका दाखिल नहीं हुई थी।
CJI ने कहा, “यह केवल एक पत्र या अभ्यावेदन था। मैं किसी पत्र को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं?” उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने स्वयं सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से स्थिति की पुष्टि की थी।
उन्होंने आगे कहा कि नरेंद्र मिश्रा नामक अधिवक्ता की ओर से केवल एक पत्र भेजा गया था, लेकिन कुछ मीडिया संस्थानों ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए यह रिपोर्ट प्रकाशित कर दी कि अदालत ने मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।
पत्र में क्या की गई थी मांग?
अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। पत्र में आरोप लगाया गया था कि NEET-UG 2026 पेपर लीक के विरोध के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।
इसके अलावा पत्र में कथित रूप से सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा किए गए हमलों की जांच कराने तथा ड्रोन फुटेज, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई थी।
तत्काल सुनवाई की मांग पर भी हुई थी टिप्पणी
इस सप्ताह की शुरुआत में जब अधिवक्ता ने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, तब CJI की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि पहले उचित प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल की जाए। अदालत ने वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के अनुरोध पर भी कहा था कि इस स्तर पर उसके लिए पर्याप्त समय उपलब्ध नहीं है।
सरकार ने छात्रों की मांगों पर सकारात्मक रुख जताया
इधर, केंद्र सरकार ने एक बार फिर छात्रों को न्याय दिलाने का भरोसा दोहराया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात कर प्रदर्शनकारियों की चिंताओं पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि पेपर लीक और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। इसके अलावा, जंतर-मंतर और 20 जुलाई के ‘संसद चलो मार्च’ के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर भी सकारात्मक विचार किया जा रहा है। साथ ही, कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी सरकार विचार कर रही है।
